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हिंदू मंदिरों को तोड़ कर बनाई गई थी क़ुतुब मीनार, अब फिर बनेंगे मंदिर? प्रार्थियों की याचिका पर अगली सुनवाई 6 मार्च 2021 को होगी.

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देश की राजधानी दिल्ली के साकेत कोर्ट में आज सुनवाई हुई, ये सुनवाई कुतुब मीनार कॉम्प्लेक्स में हिंदू और जैन मंदिरों को फिर से बनाने और पुन: पूजा व पाठ आरंभ करने के अधिकार देने की याचिका पर हुई थी. लेकिन ये सुनवाई आज बेनतीजा रही और कोर्ट ने अधिक जानकारी की मांग करते हुए अगली सुनवाई आने वाले वर्ष के 6 मार्च तक टाल दी है.

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प्रार्थियों ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए

आपको बता दें की मंदिरों के लिए प्रार्थियों ने मांग करते हुए कहा की “केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाने चाहिए की वो एक ट्रस्ट का निर्माण करें. सरकार को ट्रस्ट के एडमिनिस्ट्रेशन की योजना के पश्चात मंदिर कॉम्प्लेक्स का मैनेजमेंट ट्रस्ट के हाथों में दे देवें”. इसके अलावा उनकी मांग है की “केंद्र सरकार या ASI दोनों को मंदिरों की रीपेरिंग, कंस्ट्रक्शन के काम, पूजा-दर्शनों के कार्यक्रमों में किसी भी प्रकार की दखल देने से रोका जाए.

मंदिर निर्माण प्रार्थियों की मुख्य दलीलें

मंदिरों के पुनर्निर्माण की मांग कर रहे प्रार्थियों की दलील है की “कुतुब मीनार की कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद पहले के हिंदू और जैन धर्मों के मंदिरों को तोड़ कर बनाई गई है, इसमें हिंदू और जैन धर्मों के कुल 27 मंदिर थे”. इस मामले में 3 लोगों ने कोर्ट में अर्जी दी है जो की हिंदू मंदिरों के अलावा तीर्थंकर ऋषभदेव और भगवान विष्णु को भी पिटीशनर बनाया है.

मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने ही कुतुब-मीनार कॉम्प्लेक्स वाली मस्जिद को 27 मंदिरों को तोड़कर बनाया था, परंतु ऐबक मंदिरों को पूरी तरह से ध्वस्त करने में नाकामयाब रहा लेकिन मंदिरों के ही मटेरियल से वहां मस्जिद बनाई है क्योंकि कॉम्प्लेक्स की दीवारों, खम्बों और छत पर भी हिंदू देवी – देवताओं की धार्मिक प्रतिमाएं भी बनी हुई स्पस्ट रूप से देखा जा सकता है. इसमें भगवान विष्णु और गणेश जी के चित्र देखने को मिले हैं.

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By Sachin

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