विक्रम संवत 2078
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आज से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2078 का शुभारम्भ हो चूका है, पंचांग के अनुसार यह प्रति वर्ष चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को आरम्भ होता है और चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वर्ष का अंतिम दिवस माना जाता है.

विक्रम संवत 2078 का हुआ आरम्भ

हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2078 का आज से यानि 13 अप्रैल 2021 से आगाज हो गया है. ब्रह्म पुराण के अनुसार चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मा जी ने पृथ्वी की रचना की थी, इसी कारण इस दिवस से ही प्रति वर्ष नववर्ष का आरम्भ दिवस मनाया जाता है.

विक्रम संवत 2078

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इसी दिन से ही चैत्र माह की नवरात्रि शुरू हो जाती है, बता दें की इसे भारत भर में बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है, इसे मुख्य पर्वों में से एक माना जाता है, महाराष्ट्र और मध्य में इस दिन को गुड़ी पड़वा पर्व के रूप में मनाया जाता है और दक्षिण भारत में इस मौके पर उगादि के रूप में मनाया जाता है.

सम्राट विक्रमादित्य का रहस्यमय इतिहास

उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने ही विक्रम संवत का आरम्भ किया था, उनके जीवन का इतिहास अत्यंत रहस्मय और पराक्रम से भरा हुआ है. बता दें की सम्राट विक्रमादित्य गर्दभिल्ल वंश के शासक थे इनके पिता का नाम राजा गर्दभिल्ल था और वह अपने ज्ञान, वीरता और उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे. शकों को पराजित करने के बाद उन्हें 14 राजाओं ने मिलकर चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य उपाधि दी.

चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य

चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने अपने कार्यकाल में धर्म का प्रचार प्रसार भी और कई इतिहासकारों के अनुसार उन्होंने अपने राज्य की सीमा का विस्तार वर्तमान अरब तक कर लिया था. सम्राट विक्रमादित्य और शनि देव की कथा भी बहुत प्रसिद्ध है. उन्होंने ने ही राज्य में विश्व के सर्व प्रथम नौ विद्वानों वाले समूह नवरत्न का गठन किया.

इस नवरत्न की सूचि में धन्वन्तरि, क्षपनक, अमरसिंह, शंकु, खटकरपारा, कालिदास, वेतालभट्ट अथवा बेतालभट्ट, वररुचि और वराहमिहिर उज्जैन में विक्रमादित्य के राज दरबार के नवरत्न थे. ईसा पूर्व 56 में शकों पर अपनी जीत के बाद इन्होनें विक्रम संवत की शुरुआत की थी.

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By Sachin

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