पृथ्वीराज चौहान जयंती

वीर शिरोमणि सम्राट पृथ्वीराज चौहान जयंती आज, इस अवसर पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने अलीगढ़ में रक्तदान के लिए शिविर का आयोजन करेंगें.

जागरण की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने दिल्ली के अंतिम हिंदू राजा पृथ्वीराज चौहान की जयंती पर रक्तदान शिविर का आयोजन करेंगें. इस महासभा के जिलाध्यक्ष डा. शैलेद्र पाल सिंह ने जानकारी देते हुए कहा की “शिविर जिला अस्पताल में सुबह 9 से दोपहर 12:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा, हम इस अवसर पर समाज के लोगों से अधिक से अधिक रक्तदान करने की अपील करते है”. डा. शैलेंद्र पाल सिंह ने यह भी बताया कि “कोरोना के चलते रक्तदान शिविर कम आयोजित हो पाएं हैं, ऐसे में सोमवार को रक्तदान शिविर से काफी मदद मिलेगी. क्षत्रिय समाज ने हमेशा राष्ट्र की रक्षा की है, पृथ्वीराज चौहान जयंती पर यह अच्छा अवसर है”.

विक्की पीडिया की जानकारी के अनुसार पृथ्वीराज चौहान अजमेर के चौहान वंश के सबसे प्रतापी राजा थे, वे इस वंश के तीसरे पृथ्वीराज नामक वंशज थे और इसलिए उन्हें पृथ्वीराज तृतीय के नाम से जाना जाता है. उन्होंने वर्तमान उत्तर-पश्चिमी भारत में पारंपरिक चौहान क्षेत्र सपादलक्ष पर शासन किया, उन्होंने वर्तमान राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली और पंजाब सहित मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से पर भी नियंत्रण किया, उनकी राजधानी अजयमेरु यानि की आधुनिक अजमेर व दिल्ली रही, हालांकि मध्ययुगीन लोक किंवदंतियों ने उन्हें भारत के राजनीतिक केंद्र दिल्ली के राजा के रूप में वर्णित किया है जो उन्हें पूर्व-इस्लामी भारतीय शक्ति के प्रतिनिधि के रूप में चित्रित करते हैं.

पृथ्वीराज चौहान जीवन काल में उनके परम शत्रु उन्हीं के ससुर जयचंद थे और चौहान की सबसे ज्यादा स्पर्धा इस्लामिक हमलावर मोहमद गोरी से चली, इतिहासकारों के मुताबिक पृथ्वीराज चौहान ने गोरी को 17 बार पराजित किया था, तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज की जबर्दस्त जीत के बाद गोरी वहां से जान बचाकर भाग गया. इससे उसे ये एहसास हो गया की पृथ्वीराज को बल से नहीं मारा जा सकता है. इसलिए तराइन के दुसरे युद्ध में मोहमद ने छल का सहारा लिया और इस बार उसका साथ गद्दार जयचंद ने भी दिया.

अंततः पृथ्वीराज युद्ध हार गए और गोरी ने उसे बंदी बना लिया, चंद बरदाई द्वारा रचित ‘पृथ्वीराज रासो’ नामक महाकाव्य में ये वर्णित है की गोरी की केद में पृथ्वीराज को बहुत यातनाएं सहनी पड़ी. उसकी दोनों आँखें बिंध दी गई और पैर भी तोड़े गए. बाद में एक सुनियोजित ढंग से पृथ्वीराज ने चंद बरदाई के साथ मिलकर उनका एक दोहा सुनकर केवल एक ही शब्दभेदी बाण से मोहमद गोरी का वध कर दिया. ‘पृथ्वीराज रासो’ में वो दोहा कुछ इस प्रकार से वर्णित है-

“चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण

तान उपर सुल्तान है, मत चुके चौहाण”

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By Sachin

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