बंगाल-हिंसा

बंगाल-हिंसा

2 मई को हुई मतगणना के नतीजे सामने आने के बाद शुरू हुई बंगाल हिंसा का दौर लगातार जारी है. जैसे ही नतीजे सामने उसके बाद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकताओ ने हिंसा शुरू कर दी. तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओ ने नतीजे सामने आने साथ ही बीजेपी कार्यालयों और कार्यकर्ताओ को निशाना बनाना शुरू कर दिया.

जिसके बाद बीजेपी के कार्यालयों में तोड़ फोड़ और आगजनी की गयी. बीजेपी कार्यकर्ताओ और उनके परिवारजनो को निशाना बनाया गया. अब तक हुई हिंसा में बीजेपी के कई कार्यकर्ता मारे गये है. लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी मीडिया में बंगाल हिंसा को लेकर कोई चर्चा नहीं है.

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हिंसा के इस दौर में लिबरल मिडिया का घिनोना चेहरा भी सामने आया है. ‘स्क्रॉल’ और ‘द वायर’ जैसे लिबरल मीडिया संस्थान बंगाल हिंसा की निंदा करने की बजाय जायज ठहराने में व्यस्त है. लिबरल मिडिया का पूरा जोर इन घटनाओं को छिपाने, इन्हें सही ठहराने या फिर इनके महिमामंडन पर है.

‘स्क्रॉल’ और ‘द वायर’ ने बंगाल हिंसा पर जो लेख लिखे है उनमे इन दोनों ने तृणमूल के गुंडों द्वारा की जा रही हिंसा को ‘महज पार्टी पॉलिटिक्स’ बताया है. स्क्रॉल ने अपने लेख में बताया है कि क्यों बंगाल में हो रही हिंसा को सांप्रदायिक बताना गलत है. वही द वायर ने अपने लेख में बताया है कि ये हिंसा एक तरफ़ा नहीं है.

इस लेख में बताया गया है कि इस हिंसा में सभी समुदायों पर हमले हुए है. ये हिंसा सांप्रदायिक नही बल्कि राजनितिक है. वायर के अनुसार   तो हमें इस हिंसा पर चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये सांप्रदायिक नहीं बल्कि राजनितिक है. ये सब तब हो रहा है जब टीएमसी के गुंडों द्वारा की गयी हिंसा के शिकार केवल भाजपा के लोग ही नहीं बल्कि कांग्रेस और सीपीआई के कार्यकर्ता भी हो रहे है. मोदी विरोध में लिबरल मीडिया इतना नीचे गिर जाएगा ये किसी ने भी नहीं सोचा था.

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One thought on “बंगाल हिंसा पर लिबरल मीडिया की बेशर्मी, निंदा की बजाय जायज ठहराने में व्यस्त”

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