वैष्णो देवी मंदिर

जम्मू में अत्यंत ही भव्य मां वैष्णो देवी मंदिर स्थित हैं, त्रेतायुग में भगवान राम ने कल्कि रूप में माता वैष्णो देवी से विवाह करने का वरदान दिया.

मां वैष्णो देवी मंदिर हिंदुओं का परम आस्था केन्द्रों में से एक माना जाता है, जम्मू व कश्मीर राज्य के जम्मू जिले में स्थित इस भव्य मंदिर में माता रानी के दर्शन करने दूर दूर से लोग भी आते हैं. यह मंदिर त्रिकुट पर्वत पर स्थित हैं, बता दें की इस धार्मिक स्थल की आराध्य देवी, वैष्णो देवी को सामान्यतः माता रानी और वैष्णवी के नाम से भी जाना जाता है।

विक्की मीडिया की जानकारी के मुताबिक एक प्रसिद्ध प्राचीन मान्यता के अनुसार माता वैष्णो के एक परम भक्त श्रीधर की भक्ति से प्रसन्न होकर माँ ने उसकी लाज रखी और दुनिया को अपनी सत्येता और वास्तविक अस्तित्व का प्रमाण भी दिया. इसके अलावा हिंदू महाकाव्य में माता से जुड़ी एक अलग ही कथा प्रचलित हैं और इस कथा की माने तो त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने माता को कल्कि रूप में विवाह करने का वचन भी दिया हैं।

इस महाकाव्य के अनुसार मां वैष्णो देवी ने भारत के दक्षिण में रत्नाकर सागर के घर जन्म लिया, उनके लौकिक माता-पिता लंबे समय तक निःसंतान थे. दैवी बालिका के जन्म से एक रात पहले, रत्नाकर से वचन लिया कि बालिका जो भी चाहे, वे उसकी इच्छा के रास्ते में कभी नहीं आएंगे. मां वैष्णो देवी को बचपन में त्रिकुटा नाम से बुलाया जाता था।

बाद में भगवान विष्णु के वंश से जन्म लेने के कारण वे वैष्णवी कहलाईं. जब त्रिकुटा 9 साल की थीं, तब उन्होंने अपने पिता से समुद्र के किनारे पर तपस्या करने की अनुमति चाही. त्रिकुटा ने राम के रूप में भगवान विष्णु से प्रार्थना की, सीता की खोज करते समय श्री राम अपनी सेना के साथ समुद्र के किनारे पहुंचे तो उनकी दृष्टि गहरे ध्यान में लीन इस दिव्य बालिका पर पड़ी. त्रिकुटा ने श्री राम से कहा कि उसने उन्हें अपने पति के रूप में स्वीकार किया है, श्री राम ने उसे बताया कि उन्होंने इस अवतार में केवल सीता के प्रति निष्ठावान रहने का वचन लिया है. लेकिन भगवान ने उसे आश्वासन दिया कि कलियुग में वे कल्कि के रूप में प्रकट होंगे और उससे विवाह करेंगे।

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