गांधारी

महाभारत के भीषण युद्ध के बाद दुर्योधन की मां गांधारी ने अपने 100 पुत्रों की हत्या का दोषी भगवान श्री कृष्ण को मानते हुए उन्हें एक कठोर शाप दे दिया.

विश्व में अब तक के इतिहास का सबसे भीषण और विनाशकारी युद्ध महाभारत के युद्ध को माना जाता है, इस युद्ध में तत्कालीन समय के करोड़ों योद्धाओं को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी. लेकिन इस युद्ध के बाद जब पांडव हस्तिनापुर अपने तातश्री सम्राट धृतराष्ट्र के पास गए तब उनके साथ भगवान श्री कृष्ण भी पहुंचें. उन्हें वहां पाकर दुर्योधन की मां गांधारी ने अपने पुत्र विलाप में रोते हुए भगवान श्री कृष्ण को शाप दे दिया की जिस प्रकार आपस में लड़कर कोरु वंश का विनाश हुआ है, उसी प्रकार आपस में लड़कर यदुवंश का भी सर्वनाश हो जाएगा.

गौरतलब है की भगवान श्री कृष्ण यदुवंशी थे और द्वारिका के राजा भी थे, जहां यदुवंशी अधिक थे. भगवान कृष्ण ने गांधारी के श्राप को स्वीकार किया. जिसके बाद यानि की महाभारत युद्ध के 36 वर्षों के बाद द्वारिका में गांधारी के शाप का असर शुरू हुआ और एक पय पदार्थ को पीकर सभी यदुवंशी प्रमुख एक दुसरे के खून के प्यासे हो गए, परिणामस्वरूप सभी का आपस में ही युद्ध हुआ और सारे यदुवंशी एक ही दिन समाप्त हो गए. बाद श्री कृष्ण ने भी एक भील शिकारी के हाथों बाण लगवाकर अपने मनुष्य शरीर का त्याग कर दिया.

abp न्यूज़ की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक गांधारी ने श्री कृष्ण को ऐसा शाप इसलिए दिया की वो उन्हें ही महाभारत युद्ध के होने और उनके सभी 100 पुत्रों की मृत्यु का कारण मानती थी. बता दें की दुर्योधन के प्रिय मामा श्री शकुनी गांधारी का ही भाई था, जिसने ही कपट और छल करके युधिष्ठिर के हाथों उसकी पत्नी पांचाली द्रोपदी को द्युत में हरवाया था. जिसके बाद दुस्सासन ने उसका चीर हरण करने का प्रयास किया और उसी अपराध के कारण महाभारत युद्ध का आवाहन किया गया.

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