गैवीनाथ धाम

मध्यप्रदेश के बिरसिंहपुर में स्थित देवों के देव महादेव के गैवीनाथ धाम पर हमला कर हिंदू घृणास्पद मुगल शासक औरंगजेब को भी पछताना पड़ा था.

इस दिव्य मंदिर के इतिहास की बात करें तो ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार देवपुर में राजा वीर सिंह का राज्य हुआ करता था, वे महादेव के अनन्य भक्त थे. जब राजा वृद्ध हुए तब उन्होंने महाकाल से अपनी व्यथा बताई, तब महाकाल ने राजा के स्वप्न में देवपुर में ही दर्शन देने की बात कही. उसी समय नगर के ही गैवी यादव नामक व्यक्ति के यहां चूल्हे से शिवलिंग निकला, महाकाल एक दिन फिर से राजा वीर सिंह के स्वप्न में आए और बताया कि वह जमीन से निकलना चाहते हैं लेकिन गैवी की माँ उन्हें फिर जमीन में धकेल देती है.

बाद में राजा स्वयं गैवी के घर पहुँचे और जिस स्थान से शिवलिंग चूल्हे से बाहर आने का प्रयास कर रहा था, उस स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया और महाकाल के आदेश के अनुसार भगवान शिव इस स्थान पर गैवीनाथ के रूप में प्रतिष्ठित हुए. बता दें की गैवीनाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग को भगवान महाकाल का ही रूप माना जाता है. यह मंदिर विंध्य समेत पूरे मध्य भारत में आस्था का केंद्र माना जाता है. बताया जाता है की त्रेतायुग में यह स्थान देवपुर कहलाता था, इस स्थान और गैवीनाथ मंदिर का वर्णन पदम पुराण के पाताल खंड में मिलता है. बता दें की इस मंदिर में स्थित शिवलिंग धरती में कितना गेहरा है, इसका कोई अनुमान नहीं है.

मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित गैवीनाथ धाम पर मुस्लिम आक्रांता औरंगजेब ने अपनी सेना सहित आक्रमण किया था, किन्तु वो विफल रहा, स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार आज से 317 साल पहले 1704 में मुगल आक्रांता औरंगजेब हिंदू मंदिरों को नष्ट करने के क्रम में इस स्थान पर पहुंचा था. औरंगजेब ने पहले अपनी तलवार से शिवलिंग पर प्रहार किया लेकिन उसे तोड़ने में असफल रहने पर उसने अपनी सेना को आदेश दिया, शिवलिंग पर पांच बार प्रहार किया गया. बता दें की शिवलिंग से पहले प्रहार में दूध निकला, दूसरे प्रहार में शहद, तीसरे प्रहार में खून और चौथे प्रहार में गंगाजल, औरंगजेब के सैनिकों द्वारा शिवलिंग पर किए गए पांचवें प्रहार में लाखों की संख्या में भंवर अथवा मधुमक्खी निकली. ये सब देख अपनी जान चली जाने के डर से औरंगजेब सेना सहित जान बचाकर भागना पड़ा.

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