अंबाजी मंदिर

बनासकांठा जिले में स्थित भव्य शक्तिपीठ श्री अरासुरी अंबाजी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है, इसी पवित्र स्थान पर माता सती का ह्रदय आकर गिरा था.

भारत और उसके आस – पास के देशों में माता शक्ति को समर्पित 51 शक्तिपीठ स्थापित हैं, उन सभी शक्तिपीठों का एक अलग ही महत्व है. आज आपको अंबाजी मंदिर के दर्शन करवाने जा रहे हैं, ये मंदिर केवल सभी शक्तिपीठों में दुर्लभ नहीं है बल्कि पुरे देश भर में दुर्लभ मंदिर हैं. वो इसलिए की इस मंदिर के गर्भगृह में कोई भी प्रतिमा स्थापित नहीं है, इसके अलावा पौरोणिक मान्यताओं के अनुसार ये वही मंदिर हैं जहां पर भगवान श्री कृष्ण का मुंडन संस्कार हुआ था. यह मंदिर गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित हैं.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक अंबाजी मंदिर का इतिहास युगों पुराना है क्योंकि यह वही स्थान है जहां माता सती का हृदय गिरा था, जिस कारण यह शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. इस दिव्य स्थान का वर्णन तंत्र चूड़ामणि में भी मिलता है. मंदिर के निर्माण के बारे में कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है. लेकिन हाल में हुए कुछ अध्ययनों से यह पता चला है कि मंदिर का निर्माण वल्लभी शासक सूर्यवंश सम्राट अरुण सेन के चौथी शताब्दी में कराया गया था.

बता दें की अंबाजी मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1975 में शुरू हुए जीर्णोद्धार के बाद प्राप्त हुआ है. माता शक्ति के भक्तों की यह मान्यता भी है की यह स्थान ब्रह्मांड की शक्ति का केंद्र है. मंदिर का स्थान 51 शक्तिपीठों में स्थान के कारण इस मंदिर का भी इतिहास सतयुग से जुड़ा मिलता है. अवगत कराते चलें जी माता सती के अग्नि गुंड में समाने के बाद भगवान शिव क्रोधित हो गए और फिर उन्हें शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने माता सती की मृत देह को अपने सुदर्शन चक्र के प्रहार से 51 भागों में बांट दिया और फिर वे अंग धरती भी जहां भी गिरे वह स्थान पवित्र शक्तिपीठ कहलाता है.

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By Sachin

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