अष्ठभुजा मंदिर

प्रतापगढ़ के गोंडे गांव में स्थित हैं अष्ठभुजा मंदिर, इस मंदिर की मूर्ति बिना सर की है और यहां लंबे समय से ही खंडित मूर्ति की ही पूजा होती है.

भारत में अनेकों मंदिर विदेशी आक्रांताओं के शिकार हुए हैं. उनमें से ही एक हैं अष्ठभुजा मंदिर. अष्ठभुजा मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के गोंडे गांव में स्थित हैं. इस मंदिर का भी इतिहास महाभारत और रामायण काल से जुड़ा हुआ है. मंदिर की मूर्ति का सर कटा हुआ है. बता दें की इस मंदिर पर भी कट्टरपंथी औरंगजेब ने अपनी मुगुल सेना भेजकर तोड़ने का प्रयास किया था, इसी दौरान मूर्ति के सर को काट दिया गया और तब से लेकर अब तक खंडित मूर्ति की ही पूजा की है.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान मंदिर के विषय में भी पुरातत्वविदों में मतभेद देखने को मिलता है. कुछ इसे 11वीं शताब्दी का बना हुआ मानते हैं और यह संभावना प्रकट करते हैं कि मंदिर का निर्माण सोमवंशी राजाओं ने करवाया होगा. यही तथ्य पुरातत्व विभाग के गजेटियर में दर्ज है. मंदिर की कुछ नक्काशी और शिल्पकलाएं मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित प्राचीन मंदिरों से मिलती जुलती सी है. मगर कुछ विशेषग्य इससे अलग विचार रखते हैं.

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कुछ इतिहासकारों का यह मानना है की इस मंदिर का अस्तित्व सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान भी था. ऐसा इसलिए क्योंकि मंदिर की दीवारों के कई हिस्सों पर की गई नक्काशियाँ, सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान की जाने वाली नक्काशियों और मूर्ति की बनावट से मिलती-जुलती है. इसके अलावा मंदिर के मुख्य द्वार पर किसी विशेष लिपि में कुछ लिखा गया है. इतिहासकार इसे ब्राह्मी लिपि बताते हैं तो कुछ इसे उससे भी पुराना मानते हैं. यही कारण है की वर्तमान मंदिर के विषय में पुख्ता जानकारी नहीं है.

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