असीरगढ़ शिव मंदिर

बुरहानपुर में स्थित असीरगढ़ शिव मंदिर में महाभारत युद्ध के बाद जीवित और श्रापित योद्धा अश्व्थामा आज भी यहां महादेव शिव की पूजा करने आता है.

भारतीय इतिहास में कुछ ऐसे अद्भुत तथ्य मिलते हैं जो अविश्वसनीय होते हैं. ऐतिहासिक ग्रन्थों के अनुसार आदि काल के पहले से लेकर अब तक कुछ ऐसे दिव्य पुरुषों ने धरती पर जन्म लिया, जो किसी न किसी कारण आज भी जीवित हैं. मुख्यतः उनमें भगवान विष्णु के अवतार भगवान परशुराम, श्री राम के परम भक्त हनुमान और महागुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्व्थामा जैसे योद्धाओं के नाम भी शामिल है. अश्व्थामा आज भी असीरगढ़ शिव मंदिर में भगवान महादेव की पूजा करने आते हैं.

मध्य प्रदेश में बुरहानपुर जिले की सतपुड़ा की पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक असीरगढ़ के किले में अति प्राचीन शिव मंदिर है, जिसे असीरगढ़ शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है. इसी मंदिर में अश्व्थामा पूजा करने आते हैं और पूजा के बाद वो किसी को दिखाई भी नहीं देता. बताया जाता है की अश्वत्थामा आते हैं और ब्रह्ममुहूर्त में पहली पूजा कर चले जाते हैं. इस चमत्कार के अलावा इस मंदिर में सर्वाधिक श्रद्धालु श्रवण मास में ही आते हैं और अपने अराध्य भगवान शिव की पूजा कर अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करवाते हैं.

महाभारत के महा इतिहास के अनुसार कोरवों और पांडवों के बिच हुए भीषण युद्ध में दुर्योधन की मृत्यु के बाद युद्ध को समाप्त कर दिया गया, युद्ध के अंतिम परिणाम में पांडवों की ओर से भगवान श्री कृष्ण और पाँचों पांडव जीवित बचे और कोरवों के ओर से कृपाचार्य और द्रोणाचार्य के पुत्र अश्व्थामा जीवित बचे, बाकि युद्ध में समलित होने वाले सभी योद्धा मारे गए. बाद में अश्व्थामा ने जब अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा पर उसके गर्भ को नष्ट करने के लिए ब्र्ह्मशिरा अस्त्र छोड़ दिया, बाद में श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र ने उस अस्त्र को रोक कर दोनों के प्राण बचाए. अश्व्थामा की ऐसी हरकत पर भगवान कृष्ण को अत्यंत क्रोध आया और उन्होंने अश्व्थामा को अमर रहने का अभिश्राप दे दिया. जिसके बाद इतने सालों से अश्व्थामा आज भी मृत्यु की चाहत के लिए भटक रहा है.

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