भोजशाला सरस्वती मंदिर

धार जिले का भोजशाला सरस्वती मंदिर ऐसा धार्मिक स्थल हैं जहां पर बसंत पंचमी भी मनाई जाती है और शुक्रवार के दिन नमाज भी पढ़ी जाती हैं.

भारत में अनेकों मंदिरों की विदेशी इस्लामिक आक्रांताओं ने अपनी हिंदू घृणा वाली सोच का शिकार बनाया है, इसमें मुख्य नाम वाराणसी का काशी विश्वनाथ और मथुरा का कृष्ण जन्मभूमि मंदिर का है. पहले अयोध्या का राम मंदिर भी मुख्य श्रेणी में था लेकिन अब वहां बाबरी मस्जिद नहीं भव्य राम मंदिर का निर्माण जारी है. इन सभी अनेकों मंदिरों में से एक मंदिर है मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला सरस्वती मंदिर. इसे इस्लामिक कट्टरपंथी अलाउद्दीन खिलजी ने ध्वस्त करवाया था.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक इस पवित्र स्थली को एक जमाने में सरस्वती सदन भी कहा जाता था. परमार राजवंश के शासक राजा भोज ने धार में एक महाविद्यालय की स्थापना की थी जिसे बाद में भोजशाला के रूप में जाना जाने लगा. राजा भोज माता सरस्वती के महान उपासक थे और संभवतः यही कारण था कि उनकी रूचि शिक्षा एवं साहित्य में बहुत ज्यादा थी. राजा भोज ने ही सन् 1034 में भोजशाला के रूप में एक भव्य पाठशाला का निर्माण किया और यहां माता सरस्वती की एक प्रतिमा भी स्थापित की थी.

बताया जाता है की भोजशाला सरस्वती मंदिर विद्या की देवी माता सरस्वती को समर्पित होने के कारण यह भारत के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक था. यह मंदिर संसार का सबसे पहला संस्कृत अध्ययन केंद्र भी हुआ करता था. यहां पर आध्यात्म, राजनीति, आयुर्वेद, व्याकरण, ज्योतिष, कला, नाट्य, संगीत, योग, दर्शन आदि विषयों का ज्ञान प्राप्त करने देश – दुनिया के बड़े से बड़े विद्वान आते थे. मगर कट्टरपंथी इस्लामिक आक्रांताओं ने इसे पूर्णतः ध्वस्त करवा दिया, सैंकड़ों सालों के बाद अंग्रेजों ने भोजशाला को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया. अब यहां पर पुलिस की कड़ी निगरानी में बसंत पंचमी भी मनाई जाती है और शुक्रवार को नमाज भी पढ़ी जाती है, साल 2013 में बसंत पंचमी शुक्रवार को ही थी और इस कारण यहां तनाव भी बहुत बढ़ा था.

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