ब्रह्मास्त्र

हर तरफ ब्रह्मास्त्र फिल्म की चर्चा है, लेकिन इस लेख में हम बताएंगे की आखिर ‘ब्रह्मास्त्र’ है क्या? क्यों उसे सर्वशक्तिशाली अस्त्र भी कहा जाता है।

प्राप्त जानकारियों के मुताबिक रणवीर कपूर और आलिया भट्ट स्टारर फिल्म ब्रह्मास्त्र पर्दे पर रिलीज हो चुकी है। लेकिन फिल्म को ऐसा नाम देने का कोई कारण समझ नहीं आता है। इसे ये नाम श्रृष्टि के रचयिता भगवान ब्रम्हा के द्वारा निर्मित किए जाने पर दिया गया है। इसकी भयावहता का अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि इतिहास में जिस किसी भी महायोद्धा के पास ये अस्त्र था, उसने सदैव क्रियाशील करने से बचने की कोशिशें की। इसकी वजह इसकी मारक क्षमता थी। बॉलीवुड की फिल्म में इसका वर्णन नहीं किया गया है।

हालाँकि, अगर हम ब्रम्हास्त्र की महिमा और इसकी मारक क्षमता के बारे में जानना चाहते हैं तो हमें हमारे सनातन संस्कृति में झाँकना पड़ेगा। सनातन संस्कृति की जड़ों वेदों, उपनिषदों और महाकाव्यों में इसका भलीभाँति वर्णन किया गया है। इसके रामायण और महाभारत में ऐसे कई योद्धा थे, जो कि इस महान अस्त्र को संचालित करने की योग्यता रखते थे। शास्त्रों में कहा गया है कि ब्रम्हा जी ने इस महान अस्त्र का निर्माण असुरों से निपटने के लिए किया था, लेकिन बाद में असुरों ने भी ब्रम्हा की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न कर वरदान स्वरूप ब्रम्हास्त्र प्राप्त कर लिया। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस में इसका उल्लेख करते हुए कहा गया है।

ब्रह्म अस्त्र तेहि साँधा कपि मन कीन्ह बिचार।

जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार॥

 

ये घटना तब की है जब माँ सीता की खोज में महाबली हनुमान लंका गए थे। माँ सीता से मिलने के बाद वो रावण के बगीचे अशोक वाटिका में गए। वहाँ उन्होंने रावण के छोटे बेटे अक्षय कुमार को मार गिराया, जिसके बाद मेघनाथ ने उनपर ब्रम्हास्त्र का संधान किया। हालाँकि, ब्रम्हा जी के वरदान के कारण वो केवल मूर्छित हुए। इस अस्त्र को लक्षम्ण ने भी इस्तेमाल करना चाहा था, लेकिन भगवान राम ने मना कर दिया। महाभारत में अस्वत्थामा ने इसका प्रयोग किया था और उसके प्रतिउत्तर में अर्जुन ने भी इसका संधान किया था।

हालाँकि, बाद में महर्षि वेदव्यास के आदेश पर अर्जुन ने तो इसे वापस ले लिया,लेकिन अस्वत्थामा ऐसा न कर सकता। बाद में उसने इसे अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में मोड़ दिया, जिससे उनका गर्भ नष्ट हो गया था। हालाँकि, भगवान श्रीकृष्ण ने उसे बचा लिया। महाभारत में ब्रम्हास्त्र के संधान की प्रक्रिया पितामह भीष्म, अर्जुन, गुरु द्रोण, महारथी कर्ण, अश्वत्थामा को ज्ञात थी।

इसकी तुलना परमाणु बम से की जाती है। फॉदर ऑफ एटम बम रॉबर्ट जे ओपनहाइमर ने परमाणु बम बनाने के बाद इसकी विनाशक शक्ति को देखकर खुद पर बहुत पछताए थे। उन्होंने गीता के श्लोक का वर्णन करते हुए कहा था, “अब मैं मृत्यु बन गया हूँ, पूरे विश्व को तबाह करने वाला।” ये श्लोक भगवान श्रीकृष्ण ने कहे थे।

 

श्री भगवानुवाच

कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो

लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः।

ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे

येऽवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः।।

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