चंद्रोदय मंदिर

भगवान श्री कृष्ण को समर्पित वृंदावन में बन रहा चंद्रोदय मंदिर संसार का सबसे ऊंचा मंदिर होगा, इसकी ऊंचाई लगभग 700 फिट होने वाले है.

भारत की पहचान जल्द ही कुछ परिवर्तन होने वाली है, क्योंकि एक तो श्री राम की नगरी अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनने जा रहा है और दूसरा वृंदावन में भगवान श्री कृष्ण का विशाल व अद्भुत चंद्रोदय मंदिर बनने जा रहा है. फ़िलहाल ये दोनों मंदिर निर्माणाधीन हैं और 2024 तक दोनों के ही सम्पूर्ण रूप से तैयार होने की आशंका जताई जा रही है. बता दें की यह मंदिर सृष्टि का सबसे ऊंचा मंदिर होने वाला है और इसकी ऊंचाई 700 फिट यानि की 213 मीटर होगी.

विक्की पीडिया की जानकारियों के मुताबिक वृंदावन चन्द्रोदय मंदिर को इस्कोन की बैंगलोर इकाई के संकल्पतः कुल 300 करोड़ की लागत से निर्मित किया जा रहा है. इसके गगनचुम्बी शिखर के अलावा इस मंदिर की दूसरी विशेष आकर्षण यह है की मंदिर परिसर में 26 एकड़ के भूभाग पर चारों ओर 12 कृत्रिम वन बनाए जाएंगे, जो मनमोहक हरेभरे फूलों और फलों से लदे वृक्षों, रसीले वनस्पति उद्यानों, हरी लंबी चराईयों, हरे घास के मैदानों, फलों का असर पेड़ों की सुंदर खा़काओं, पक्षी गीत द्वारा स्तुतिगान फूल लादी लताओं, कमल और लिली से भरे साफ पानी के पोखरों एवं छोटी कृत्रिम पहाड़ियों और झरनों से भरे होंगें, जिन्हें विशेश रूप से पूरी तरह हूबहू श्रीमद्भागवत एवं अन्य शास्त्रों में दिये गए, कृष्णकाल के ब्रजमंडल के 12 वनों (द्वादशकानन) के विवरण के अनुसार ही बनाया जाएगा ताकी आगंतुकों (श्रद्धालुओं) को कृष्णकाल के ब्रज का आभास कराया जा सके. 5 एकड़ के पदछाप वाला यह मंदिर कुल 62 एकड़ की भूमि पर बन रहा है, जिसमें 12 एकड़ पर कार-पार्किंग सुविधा होगी और एक हेलीपैड भी होगा.

इस मंदिर के इतिहास के बारे में बात करें तो श्रीला प्रभुपाद इस्कोन के संस्थापक ने साल 1972 में श्री रूपा गोस्वामी के भजन कुटीर के समक्ष युक्लता वैराग्य के विषय में बताया. इस समायोजन में इनके 12 से अधिक विदेशी अनुयायी थे. यहीं पर श्रीला प्रभुपाद ने कहा कि – जिस तरह हमने बड़ी बड़ी इमारतों को बनाया है, ठीक उसी तरह हम चाहें तो भगवान् श्री कृष्ण का भी एक बहुत बड़ा मंदिर का निर्माण कर सकते हैं, जिससे ‘मटेरियल एक्टिविटी’ का शुद्धिकरण हो सके. बता दें की इस मंदिर की नींव मार्च 2016 में होली के शुभ पर्व पर वृंदावन में रखी गई.

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