चौसठ योगिनी मंदिर

64 योगिनियों और 64 ही शिवलिंगों से सुशोभित इस दिव्य चौसठ योगिनी मंदिर में रात्री के समय मानव के अलावा कोई पशु और पक्षी भी नहीं जा सकता.

भारत के अद्भुत और रहस्मय मंदिरों में से एक चौसठ योगिनी मंदिर मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के पडावली के पास मितावली गांव में स्थित हैं, इस मंदिर को तांत्रिक यूनिवर्सिटी भी कहा जाता है क्योंकि दूर – दूर से छोटे बड़े साधक तंत्र विद्या और तंत्र ज्ञान की प्राप्ति हेतु इसी स्थान पर आते हैं. इस मंदिर की बनावट बड़े विचित्र ढंग से गोलाकार है. इन सब के अलावा चौसठ योगिनी मंदिर के एक रहस्य को आज तक कोई सुलझा भी नहीं पाया है, यहां रात के समय कोई भी नहीं आ सकता.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक चौसठ योगिनी मंदिर को एकट्टसो महादेव मंदिर भी कहा जाता है. मंदिर और उसके आसपास के शिलालेखों के अनुसार इसका निर्माण सन् 1323 में गुर्जर राजा देवपाल द्वारा कराया गया था. बताया जाता है की यह मंदिर सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष और गणित में शिक्षा प्रदान करने का स्थान था, इसके अलावा यह तंत्र साधना का एक महत्वपूर्ण स्थान भी था. देश के कोने-कोने से साधक अपनी तंत्र साधना के लिए यहां पहुंचते थे, इसीलिए ही इसे तांत्रिक यूनिवर्सिटी कहते हैं.

बता दें की भारत देश में कुछ ही गिने – चुने गोलाकार मंदिर हैं, जिस सूचि में चौसठ योगिनी मंदिर का नाम भी शामिल है. इस मंदिर में 64 पवित्र कक्ष हैं. इन सभी कक्षों में एक योगिनी और एक शिवलिंग सुशोभित हैं. बताया जाता है ये सारी 64 योगिनियां माता काली की अवतार हैं. गौरतलब है की मंदिर परिसर के मध्य में एक मंडप स्थापित है जहां मुख्य भी शिवलिंग विराजमान है. आस पास के लोगों का कहना है की यह मंदिर अभी भी शिव की तंत्र साधना के कवच ढका हुआ है.

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