चिल्कुर बालाजी मंदिर

रंगारेड्डी में स्थापित चिल्कुर बालाजी मंदिर में भक्तों की ‘वीजा’ प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होती है, इसे दुसरे शब्दों में ‘वीजा बालाजी मंदिर’ भी कहा जाता है.

ईश्वर को मानने वालों के लिए आस्था और विश्वास एक ऐसा मेल होता है जो उन्हें परमात्मा के उनके साथ होने का आभास करवाता है. भारत में ऐसे बहुत से मंदिर हैं जो केवल विश्वास और आस्था के कारण सैंकड़ों वर्षों से इस पावन धरती पर सुशोभित हैं. ऐसे ही एक मंदिर के बारे में आज आपको बताने वाले हैं, यह तेलंगाना के हैदराबाद से तकरीबन 28 किलोमीटर की दुरी पर रंगारेड्डी जिले में स्थापित हैं. इस मंदिर को चिल्कुर बालाजी मंदिर के नाम से जाना जाता है.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक चिल्कुर बालाजी मंदिर का इतिहास लगभग 500 साल पुराना है, कहा जाता है कि बीते समय में भगवान वेंकटेश्वर के एक ऐसे भक्त हुए थे जो पैदल ही भगवान के दर्शनों के लिए तिरुपति चले जाया करते थे. काफी समय बीत जाने के बाद जब बालाजी के भक्त असहाय हो गए और भगवान के दर्शन के लिए नहीं जा सके तो खुद बालाजी ने उनकी सहायता करी. भगवान वेंकटेश्वर अपने भक्त के सपने में आए और कहा कि उन्हें अब पैदल तिरुपति आने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि अब वो खुद अपने भक्त के पास जंगल में रहते हैं.

बताया जाता है की वह भक्त भगवान बालाजी के बताए स्थान तक पहुंचा तो उसे वह भूमि उभरी हुई दिखी. जिसके बाद एक आकाशवाणी हुई और फिर भगवान के कह अनुसार उस भूमि को दूध से नहलाकर वहां भगवान बालाजी की प्रतिमा स्थापित की गई. गौरतलब है की मंदिर द्रविड़ वास्तुशैली में निर्मित है. बता दें की मंदिर के गर्भगृह में भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा स्थापित है, यह प्रतिमा काले पत्थर से निर्मित की गई यह प्रतिमा, तिरुपति में स्थित बालाजी भगवान की ही प्रतिरूप नजर आती है.

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