प्रशासक समिति

धार्मिक संगठन प्रशासक समिति (रजि. एकात्मता एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी) ने एक बार फिर से भारत पर थोपी गई विदेशी पहचानों के खिलाफ आवाज उठाई है।

प्राप्त जानकारियों के मुताबिक 22 मई 2021 रविवार को भारत पर थोपी गई विदेशी पहचानों के खिलाफ धार्मिक संगठन प्रशासक समिति (Prashasak Samiti) ने एक अभियान चलाया और यह अभियान काफी हद तक सफल भी रहा। इस अभियान में लाखों भारतीयों ने हिस्सा लिया और ट्विटर पर “#टोपी_के_नीचे_क्या” हैशटैग भी चलाया, यह हैशटैग कल के दिन टॉप ट्रैंड तक भी गया था।

आपको बताते चलें की इस ट्रेंड के विषय में प्रशासक समिति के मार्गदर्शक मंडली के वरिष्ठ सदस्य मनीष जी भारद्वाज ने समय निकालकर खास बातचीत में कुछ बातें स्पष्ट की, इस ट्रेंड के नाम को लेकर उन्होंने कहा “अभी जैसा की ज्ञानवापी की जानकारी सामने आई है, एक ओर मस्जिद है जामा मस्जिद उसकी भी जानकारी सामने आ रही है, ताजमहल के बारे में लोग कुछ बोल रहे हैं, लाल किले के बारे में बोल रहे है, ऐसी बहुत सी जगहों के बारे में जानकारियां निकल रही हैं।”

उन्होंने आगे बताया की “सोशल मीडिया पर एक चलचित्र वायरल हो रहा है, जिसमें एक टोपी उठाओ तो नीचे राम मंदिर निकल रहा है, दूसरी उठाओ तो काशी विश्वनाथ, यही सब चीजें देखके लोगों के दिमाग को पढ़कर हमने ये हैशटैग रखा।” उन्होंने आगे बताया की सबसे बड़ी बात यह है की ये हैशटैग तीन दिनों तक ट्रेंड किया, केवल एक दिन नहीं। लोगों इसे जिस तरह सपोर्ट किया, ये सबसे बड़ी बात है।

इस ट्रेंड के उद्देश्य को लेकर मनीष जी भारद्वाज ने कहा “हमारा उद्देश्य बस इतना ही है की आज के लोगों तक यह बात पहुंचे की मुगलों ने कैसे इस देश की सांस्कृतिक धरोहरों को मिटाने की चेष्टा की थीं, जहां देश में इतनी सारी जमीन थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने किस मानसिकता के तहत हिंदुओं के मंदिरों को ध्वस्त किया और उसके ऊपर एक गुंबदनुमा टोपी रख दी। तो ये सच्चाई हम देश के लोगों को बताना चाहते हैं।”

गौरतलब है की मनीष जी ने इस बात को स्पष्ट किया की इस ट्रेंड के पीछे हम किसी भी धर्म समुदाय विशेष को टारगेट नहीं कर रहे हैं, हम लेकर विदेशी हमलावरों की सच्चाई बता रहे हैं, यह एक राष्ट्रीय विषेय है ना की कोई धार्मिक विषय। उन्होंने इस बात की भी पुष्टि करी की समिति के तमाम सदस्यों की विचारधारा भी इसी प्रकार की है, हम राजनीति नहीं करते और ना ही नफरत का काम करते हैं।

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