दंतेश्वरी माता मंदिर

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में स्थित हैं दंतेश्वरी माता मंदिर, भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर माता सती का दांत इसी स्थान पर आ गिरा था.

भारत देश में प्राचीन मंदिरों की कोई कमी नहीं है, इसी श्रेणी में दंतेश्वरी माता मंदिर का भी नाम शामिल हैं. बता दें की यह मंदिर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित हैं. मान्यताओं के अनुसार माता सती का यहां दांत आकर गिरा था, जिसके बाद से ही यह स्थान पवित्र हो गया और इसका नाम भी दंतेवाड़ा ही पड़ गया. यह मंदिर राज्य के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है जो हिंदुओं और विशेष तौर पर छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

ऑपइंडिया की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार दंतेश्वरी माता मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन हैं. मान्यताओं के अनुसार जब भगवान विष्णु ने भगवान शिव के प्रचंड क्रोध को शांत करने के लिए माता सती की मृत देह को कई भागों में विभाजित कर दिया था. इसी कारण जहां भी माता सती की देह के हिस्से गिरे वहां स्थापित हुए शक्ति पीठ. दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी माता मंदिर भी उन्हीं शक्ति पीठों में से एक माना जाता है, कहा जाता है की माता सती के दाँत इसी स्थान पर गिरे थे.

बता दें की पूरे बस्तर क्षेत्र में सर्वाधिक महत्व रखने वाला यह मंदिर 4 भागों में विभाजित है. चालुक्य राजाओं ने मंदिर का निर्माण द्रविड़ शैली में कराया था. इस मंदिर के अवयवों में गर्भगृह, महा मंडप, मुख्य मंडप और सभा मंडप शामिल हैं. गर्भगृह और महामंडप का निर्माण पत्थरों से किया गया है. विशेष बात यह भी है की देवी दंतेश्वरी बस्तर क्षेत्र के चालुक्य राजाओं की कुल देवी थीं, इसी कारण उन्होंने इस मंदिर की स्थापना की थी. यह प्राचीन मंदिर डाकिनी और शाकिनी नदी के संगम पर स्थित है. मंदिर का कई बार निर्माण हो चुका है लेकिन मंदिर का गर्भगृह लगभग 800 वर्षों से भी पुराना है.

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