दशावतार

भगवान विष्णु इस धरती पर अधर्म का नाश और धर्म की पुनर्स्थापना हेतु अनेकों अवतार ले चुके हैं, परन्तु उनमें से प्रमुख केवल दस अवतार ही माने जाते हैं जिन्हें ‘दशावतार’ रूप में भी जाना जाता है.

श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है की….

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युथानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे-युगे॥

विक्की पीडिया के मुताबिक इस श्लोग का अर्थ होता है की “जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का उत्थान हो जाता है, तब-तब सज्जनों के परित्राण और दुष्टों के विनाश के लिए मैं विभिन्न युगों में (माया का आश्रय लेकर) उत्पन्न होता हूँ”. इसी के आधार पर यह तो सुनिश्चित हो जाता है की भगवान विष्णु ने अब तक अनेकों अवतार इस धरती पर लिए हैं, मगर इनमें से हिंदू ग्रथों में दस अवतारों को प्रमुख माना गया है और उन्हें ‘दशावतार’ के नाम से भी जाना जाता है.

आइए जानते हैं उन सभी दशावतार के नाम व अवतरण के पीछे के विशेष कारण को…

  • मत्स्य अवतार: भगवान विष्णु के प्रथम माने जाने वाले मत्स्य अवतार श्री हरी ने वेदों की सुरक्षा हेतु तथा हैग्रीव नामक असुर का अंत करने के लिए लिया था.
  • कूर्म अवतार: इस अवतार को कच्छप अवतार भी कहा जाता है, क्षीरसागर के समुद्रमंथन के समय मंदार पर्वत को भगवान कूर्म ने ही अपने कवच पर संभाला था.
  • वराहावतार: राक्षस हिरण्याक्ष ने जब पृथ्वी को जल में डुबो दिया था तब भगवान विष्णु वराह अवतार लेकर पृथ्वी का कल्याण किया था और देत्यराज हिरण्याक्ष का भी वध किया.
  • नरसिंह अवतार: भगवान विष्णु इस अवतार में आधे सिंह और आधे नर यानि मानव के रूप में अवतरित होकर असुर राज हिरण्यकश्यप का अंत भी किया था.
  • वामनावतार: वामन अवतार में भगवान ने असुरों के राजा बलि से भिक्षा में तीन कदम की भूमि के रूप में समग्र ब्रह्मांड को ही मांग लिया था और बलि का उद्धार किया.
  • परशुराम अवतार: अधर्म और पाप के प्रखर विनाश हेतु भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार लिया, बता दें की भगवान परशुराम आज भी जीवित हैं और सदा अमर रहेंगें.
  • राम अवतार: भगवान विष्णु के वे अवतार जो आजीवन एक पुरुष की मर्यादा में जीए और त्रिलोक विजयी रावण का अंत भी भगवान राम ने ही किया था.
  • कृष्ण अवतार: श्रीमद्भागवत गीता के रचयता और द्वापर युग में हजारों राक्षसों का अंत करके इस धरती को अधर्म मुक्त कर दिया था, इनके देह त्याग के कुछ ही वर्षों के बाद कलयुग का आरंभ हुआ था.
  • बुद्धावतार: महात्मा बुद्ध को ही भगवान विष्णु का नवां प्रमुख अवतार माने जाते हैं और उन्होंने ही बौद्ध धर्म की स्थापना करी है.
  • कल्कि अवतार: कलयुग के अंतिम अवतार भगवान कल्कि को ही माना जा रहा है, पौरोणिक ग्रन्थों के मुताबिक इनके जन्म को अभी लाखों वर्ष ओर बाकि हैं.

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