ज्ञानवापी

वाराणसी जिला अदालत ने सोमवार (12 सितंबर 2022) को ज्ञानवापी विवाद में हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाया और मुस्लिम पक्ष की याचिका को भी खारिज किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी विवादित ढाँचे और श्रंगार गौरी के मामले में जिला कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ये माना कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर श्रृंगार गौरी की पूजा की इजाजत की माँग वाली याचिका सुनवाई के योग्य है। कोर्ट ने सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख भी तय कर दी है।

मात्र 10 मिनट में जिला जज डॉ अजय कृष्ण कृष्ण विश्वेस ने 26 पन्नों के आदेश को पढ़कर अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने रूल 7 नियम 11 के तहत किए गए आवेदन को कैंसिल कर दिया। इस बीच वाराणसी कोर्ट के इस फैसले के बाद किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए वाराणसी को हाई अलर्ट पर रखा गया है। शहर के सभी संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस फोर्स को डिप्लॉय किया गया है।

पूर्व से अपेक्षित तरीके से एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का उल्लंघन करार देते हुए कहा कि इस मामले में मुस्लिम पक्ष हाई कोर्ट में अपील करे। एआईएमआईएम सांसद ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे की तुलना बाबरी मस्जिद केस से करते हुए दावा किया कि कोर्ट के इस फैसले में देश में अशांति फैल सकती है। बहरहाल, हिंदू पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे वकील सोहनलाल आर्य ने इसे बहुत बड़ी जीत करार दिया है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर के अंदर श्रृंगार गौरी मंदिर में पूजा के लिए अनुमति देने की माँग को लेकर 18 अगस्त 2021 में चार महिलाओं ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामला आगे बढ़ा तो बात पूरे के पूरे ज्ञानवापी विवादित ढाँचे पर आ गई। वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार ने पूरे ज्ञानवापी के सर्वे का आदेश दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि हिंदुओं का दावा था कि मस्जिद की जगह पहले मंदिर था। सर्वे में शिवलिंग भी मिला था। इसके साथ ही और भी कई बड़े सबूत सर्वे के दौरान मिले जो मस्जिद के मंदिर होने की तरफ इशारा कर रहे थे।

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