सम्राट मिहिर भोज

वीर सम्राट मिहिर भोज के वंश से जुड़े विवाद के बिच अब नया पत्ता खुल चूका है, जिसके बाद यह मानना कठिन नहीं की वे ‘गुर्जर’ थे या ‘राजपूत’.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सम्राट मिहिर भोज किस वंश के थे? इस गुत्थी को सुलझाने के लिए उनके वंशज ने बड़ा खुलासा कर दिया है, उन्होंने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को राजा मिहिरभोज प्रथम की वंशावली सहित एक पत्र भेजा और इसके अलावा एक वीडियो जारी कर कई अहम बातें भी कही. बता दें की लंबे समय से दो समुदायों के बिच राजा मिहिरभोज प्रथम के वंश को लेकर विवाद बना हुआ है और लगता है इस पत्र से तो यह स्पष्ठ हो गया है की वे ‘गुर्जर’ थे या फिर ‘राजपूत’.

सम्राट मिहिर भोज
पीएम को भेजे गया पत्र

दरअसल राजा मिहिरभोज प्रथम राजकुमार अरुणोदय सिंह परिहार ने PM मोदी को भेजे गए पत्र में लिखा “मिहिर भोज ने ‘गुर्जराधिपति’ की पदवी धारण की और ‘गुर्जर देश’ पर शासन स्थापित किया. इस पूरे क्षेत्र को गुर्जर के रूप में जाता था था, इसीलिए वो गुर्जर-प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज के रूप में भी विख्यात हैं. कुछ समुदायों ने गलत धारणा और गलत व्याख्या कर के दावे किए हैं कि सम्राट मिहिर भोज उनके पूर्वक हैं –ये गलत है”. बता दें की इस पत्र में उन्होंने राजा मिहिरभोज प्रथम की पूरी वंशावली को भी पेश किया है.

सम्राट मिहिर भोज
पत्र में दी गई वंशावली
सम्राट मिहिर भोज
वंशावली का अगला भाग

उन्होंने यह भी खुलासा किया की ‘आदिवराह’ सम्राट मिहिर भोज, नागभट्ट द्वितीय के प्रत्यक्ष वंशज थे और रामभद्र के पुत्र थे, जिसके प्रमाण स्वरूप कई शिलालेख भी मिले हैं. उन्होंने लिखा “मिहिर भोज का अन्य जाति से होना गलत है. उनके नाम की प्रतिमाएँ व स्थानों का निर्माण करवाया जा रहा है, परन्तु उनका जाति-परिवर्तन किया जा रहा है, जो इतिहास के साथ सरासर छेड़छाड़ है. हमारे 1300 वर्ष पुराने मान-सम्मान को ठेस पहुँचाया जा रहा है और हम दृढ़ता से इसका विरोध करते हैं”. इसके अलावा उन्होंने एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा “जिस तरीके से राजा मिहिर भोज का जाति-परिवर्तन किया जा रहा है, वो इतिहास व उनके मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ है. क्षत्रिय इतिहास रक्त व बलिदान से लिखी गई है, जिसे इतनी आसानी से बदला नहीं जा सकता”.

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By Sachin

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