दुर्गा कुंड मंदिर

वाराणसी में स्थित दुर्गा कुंड मंदिर माता दुर्गा को समर्पित हैं, इसी स्थान पर माता ने अयोध्या के राजकुमार सुदर्शन की युद्ध में सहायता की थी.

सनातन नगरी काशी जिसे वाराणसी के नाम से जाना जाता है, इसे महादेव की नगरी भी कहा जाता है. वाराणसी में यूं तो अनेकों मंदिर हैं परन्तु उनमें से भी कुछ प्रमुख मंदिर भी हैं जो की काशी के वैभव का प्रमाण देते हैं. यहां काशी विश्वनाथ, अन्नपूर्णा मंदिर और दुर्गा कुंड मंदिर प्रमुख मंदिरों की श्रेणी में आते हैं, आज हम आपको माता दुर्गा को समर्पित दुर्गा कुंड मंदिर के बारे में बताने वाले हैं. इस मंदिर का इतिहास भी पुराना है और आस्था के सागर से निर्मित हुए है ये दुर्लभ मंदिर.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक सहस्त्राब्दियों पहले काशी के राजा सुबाहू ने अपनी पुत्री के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया लेकिन राजकुमारी ने स्वयंवर के पहले स्वप्न में अपना विवाह अयोध्या के राजकुमार सुदर्शन से होता हुआ देखा. राजकुमारी ने यह बात अपने पिता से बताई तो उन्होंने इसकी चर्चा स्वयंवर में आ चुके राजाओं से की, राजाओं ने इसे अपना अपमान समझा और सुदर्शन के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी. राजकुमार सुदर्शन ने भी इस चुनौती को स्वीकार किया.

बता दें की राजकुमार सुदर्शन प्रयागराज में भारद्वाज ऋषि के आश्रम में रहकर शिक्षा ग्रहण कर चुके थे. उन्होंने इस युद्ध में जबर्दस्त पराक्रम और शौर्य का परिचय दिया. युद्ध का सबसे दुर्लभ संगम था, आदि शक्ति का युद्ध में राजकुमार सुदर्शन के समर्थन में विद्रोहियों का संहार करना. माता दुर्गा ने यहां विरोधियों का वध करते हुए उनके रक्त से एक कुंड भर दिया. अंत में राजकुमार सुदर्शन विजयी हुए और माता ने ही उनका और राजकुमारी का विवाह करवाया, जिसके बाद राजा सुबाहु ने ही इस स्थान पर माता दुर्गा के कुंड मंदिर का निर्माण करवाया.

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