द्वारकाधीश मंदिर

द्वारिका में स्थित भगवान श्री कृष्ण के द्वारकाधीश मंदिर पर तीव्र बिजली गिरने के बाद कोई नुकसान नहीं हुआ, ध्वज ने ही बिजली को खुद में समा लिया.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गुजरात के द्वारिका में स्थित द्वारकाधीश मंदिर पर मंगलवार यानि 13 जुलाई 2021 को तेज बारिश के दौरान एक आकाशीय बिजली बड़ी तीव्रता से गिरी, मगर गौर करने वाली बात यह है की उस बिजली से मंदिर का बाल तक बांका नहीं हुआ अर्थार्त मंदिर को कण भर भी क्षति नहीं पहुंची. दरअसल बिजली को 52 गज उपर लगे भगवें ध्वज ने ही समयं के भीरत समा लिया. हैरानी की बात यह भी है की बिजली के प्रहार के बाद भी ध्वज आकाश में बिजली को मानो चुनोती देता हुआ लेहराता रहा.

बता दें श्रद्धालु इसे श्री कृष्ण का चमत्कार मानते हुए नतमस्तक हो गए. बिजली का ध्वज पर गिरने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. यह घटना तकरीबन 2 से ढाई बजे के आसपास घटित हुई. इसके बाद लोगों का कहना है की भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें बचा लिया. इस वज्रपात से केवल मंदिर की दीवारें काली हुई और अन्य कोई नुकसान नहीं हुआ. द्वारका के एसडीएम निहार भेटारिया ने बताया कि बिजली गिरने के बाद मंदिर के प्रशासन ने जांच करी, किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है.

विक्की पीडिया की जानकारियों के मुताबिक द्वारिकाधीश मंदिर भी जगत मंदिर के रूप में जाना और कभी कभी वर्तनी द्वारिकाधीश एक है हिंदू मंदिर भगवान के लिए समर्पित कृष्णा जो नाम ‘द्वारिकाधीश’ अथवा ‘द्वारका के राजा’ द्वारा यहां पूजा की जाती है. मंदिर भारत के गुजरात के द्वारका में स्थित है. 72 स्तंभों द्वारा समर्थित 5 मंजिला इमारत का मुख्य मंदिर, जगत मंदिर या निज मंदिर के रूप में जाना जाता है, पुरातात्विक निष्कर्ष यह बताते हैं कि यह 2,300 – 2,500 साल पुराना है. 15 वीं -16 वीं शताब्दी में मंदिर का विस्तार किया गया. द्वारकाधीश मंदिर एक पुष्टिमार्ग मंदिर है, इसलिए यह वल्लभाचार्य और विठ्लेसनाथ द्वारा बनाए गए दिशानिर्देशों और अनुष्ठानों का पालन करता है. परंपरा के अनुसार, मूल मंदिर का निर्माण कृष्ण के पड पोते वज्रनाभ ने हरि-गृह (भगवान कृष्ण के आवासीय स्थान) पर किया था. मंदिर भारत में हिंदुओं द्वारा पवित्र माने जाने वाले चार धाम तीर्थ का हिस्सा बन गया, 8 वीं शताब्दी के हिंदू धर्मशास्त्री और दार्शनिक आदि शंकराचार्य ने मंदिर का दौरा किया. अन्य तीन में रामेश्वरम, बद्रीनाथ और पुरी शामिल हैं. आज भी मंदिर के भीतर एक स्मारक उनकी यात्रा को समर्पित है. द्वारकाधीश उपमहाद्वीप में विष्णु के 98 वें दिव्य देशम हैं, जो दिव्य प्रभा पवित्र ग्रंथों में महिमा मंडित करते हैं.

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By Sachin

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