एट्टूमानूर महादेव मंदिर

कोट्टयम जिले में स्थित एट्टूमानूर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और रामायण और महाभारत में भी इस मंदिर का वर्णन मिलता है.

आज आपको एक ओर ऐसे भारतीय मंदिर ने बारे में बताने वाले हैं जिसका भी इतिहास महाभारत और रामायण से जुड़ा हुआ है. भगवान शिव को समर्पित एट्टूमानूर महादेव मंदिर भारत के दक्षिण में केरल के कोट्टयम जिले में स्थित हैं. बताया जाता है की रामायण काल में रावण के भाई खर ने इसी स्थान पर भगवान शिव से आशीर्वाद स्वरूप मिले शिवलिंग को स्थापित किया था. इसके बाद महाभारत काल में महर्षि वेद व्यास और पांडवों ने भी यहां महादेव की पूजा की थी.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के अनुसार बताया जा रहा है की असुर खर ने भगवान शिव से आशीर्वाद स्वरूप तीन शिवलिंग प्राप्त किए. असुर खर उन तीनों को लेकर केरल में ले आया. केरल लाते समय उसने एक शिवलिंग अपने दाँतों में दबा रखा था, वहीं दो अन्य शिवलिंग अपने दोनों हाथों में. जिनमें से जो शिवलिंग खर के दाँतों में दबाया गया था वह स्थापित हुआ कदुथुरुति में, दाएँ हाथ में जो शिवलिंग था वह वाईकोम में और बाएँ हाथ का शिवलिंग स्थापित हुआ एट्टूमानूर में स्थापित किया. जहां वर्तमान में एट्टूमानूर महादेव मंदिर स्थित हैं.

गौरतलब है की एक असुर द्वारा स्थापित शिवलिंगों पर भी तीनों स्थानों पर मंदिर बनाए हुए हैं और ये तीनों ही मंदिर हिंदुओं के लिए विशेष महत्व के हैं. रामायण के अलावा महाभारत काल की बात करें तो एट्टूमानूर महादेव मंदिर के विषय में यह भी मान्यता है कि यहां पांडव और महर्षि व्यास ने भी भगवान शिव की पूजा की थी. मंदिर के विषय में प्राप्त जानकारी के अनुसार एट्टूमानूर महादेव मंदिर के वर्तमान दृश्य स्वरूप का निर्माण आज से लगभग 5 शताब्दी पहले सन् 1542 में हुआ था। मंदिर का निर्माण केरल की वास्तुशैली के अनुसार हुआ है.

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By Sachin

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