लाउडस्पीकर

उत्तर प्रदेश में वकील आशुतोष कुमार शुक्ल ने लाउडस्पीकर को इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करी, जिसकी सुनवाई 28 मार्च को होनी है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वकील आशुतोष कुमार शुक्ल ने कहा की “कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से कई राज्यों में लगाए गए लॉकडाउन के कारण प्रत्येक नागरिक अपने घर पर है. लोग घर से ऑफिस का काम कर रहे हैं. घर से बच्चों की ऑनलाइन क्लास चल रही हैं. वकील भी घर से ही वर्चुअल सुनवाई के जरिए मुकदमों पर बहस कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में दिन में पांच बार लाउडस्पीकर के प्रयोग से मानसिक तनाव हो रहा है. शोर के कारण पास में रहने वालों की नींद में खलल पड़ती है. यह शोर टॉर्चर जैसा है”.

याचिका कर्ता ने कहा की “हर व्यक्ति को उतनी ही आसानी से सोने का हक है, जितनी आसानी से वह साँस लेता है. अच्छी नींद अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है. अंतत: नींद ऐसी मौलिक, आधारभूत आवश्यकता है, जिसके बिना जिंदगी का वजूद खतरे में पड़ जाएगा, किसी की नींद में खलल डालना उसे यातना देने के समान है, जो कि मानव अधिकार के उल्लंघन की श्रेणी में आता है”.

वकील आशुतोष कुमार शुक्ल ने ये भी कहा की “धार्मिक संगठनों को लाउडस्पीकर या एम्पलीफायर का उपयोग करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत एक स्वतंत्र अधिकार नहीं है. इसके साथ ही अनुच्छेद 25 (1) में सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य की शर्तें भी जुड़ी हुई हैं”. शुक्ल ने धार्मिक पाठ व अजान के लिए लाउडस्पीकर के नियमित उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिए जाने की माँग की है. शुक्ल ने एक पुराने मामले को याद दिलाते हुए कहा था की “अफजल अंसारी बनाम यूपी सरकार के इस केस में हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि अजान तो इस्लाम का आवश्यक एवं अटूट अंग है, लेकिन अजान का लाउडस्पीकर पर बोला जाना धर्म का आवश्यक हिस्सा नहीं है”.

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