गोविंद देव मंदिर

वृंदावन में स्थित भगवान श्री कृष्ण को समर्पित गोविंद देव मंदिर औरंगजेब की घटिया विचारधारा के भेंट चढने से पूर्व अत्यंत ही भव्य और दुर्लभ था.

मध्यकालीन भारत के इतिहास में औरंगजेब एक ऐसा शासक था जो अपने अंदर की हिंदू घृणा के कारण उसने अपने शासनकाल के दौरान अनेकों हिंदू मंदिरों को तबाह किया था. जिनमें से एक मंदिर उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित हैं, भगवान श्री कृष्ण को समर्पित गोविंद देव मंदिर को भी औरंगजेब ने अपने निशाने पर रखा और इसके वैभव को हानि पहुंचाने की कोशिश करी. यह मंदिर पहले 7 मंजिला था और इसके शिखर पर एक विशालकाय दीपक भी सुशोभित था मगर औरंगजेब ने इसे नष्ट करवा दिया, फिर भी वो इसके 4 मंजिलों को ही नष्ट कर पाया.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय इतिहासकारों का मानना है कि भगवान गोविंद देव अर्थात श्रीकृष्ण का यह मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है. वैष्णव संप्रदाय के इस मंदिर का निर्माण राजा मानसिंह ने सन् 1590 में कराया था. गोविंद देव मंदिर का निर्माण सनातन गुरु और महान कृष्णभक्त श्री कल्याणदास जी की देखरेख में हुआ था. हालांकि मंदिर निर्माण का पूरा खर्च राजा मानसिंह द्वारा ही उठाया गया था.

बता दें की जब इस मंदिर का निर्माण हुआ तो इसके 7 मंजिला शिखर पर एक विशालकाय दीपक था और उस दीपक में प्रतिदिन ज्योति भी जलाई जाती थी, इस दीपक में प्रतिदिन बाती की लौ को जलाए रखने के लिए 50 किलोग्राम से अधिक देसी घी का उपयोग होता था. इस दिव्य दीपक के कारण यह मंदिर कई किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे जाता है. बताया जाता है की औरंगजेब ने मंदिर की पवित्रता को खंडित करने के लिए मंदिर में नमाज भी पढ़ी और आधे – अधूरे ध्वस्त मंदिर पर एक गुंबद रख दिया. बाद में मंदिर का जीर्णोद्धार भी करवाया गया.

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