हसनंबा मंदिर

हासन जिले में स्थित हसनंबा मंदिर में चमत्कारिक ढंग से तकरीबन एक वर्ष तक बंद कपाट के भीतर दीप जलता, पुष्प और प्रशाद ताज़ा ही रहता है.

भारत अपने सुंदर और वैभवशाली मंदिरों के कारण भी पहचाना जाता है, इनके अलावा देश भर में अनेकों क्षत्रों में ऐसे चमत्कारिक मंदिर भी स्थापित हैं जिनके चमत्कार को आधुनिक विज्ञान भी समझ नहीं पाता. इन्हीं में से एक नाम है हसनंबा मंदिर. हसनंबा मंदिर कर्नाटक के हासन जिले में स्थित हैं. इस मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन हैं और यह अपने भीतर होने वाले चमत्कार के कारण ही भारत भर में प्रसिद्ध हैं.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक प्राचीन काल में अंधकासुर नामक राक्षस ने ब्रह्मा जी की कड़ी तपस्या करके उनसे अदृश्य होने का वरदान प्राप्त कर लिया है. ऐसा वरदान पाकर अंधकासुर ने चारों ओर अत्याचार मचा दिया. ऐसे में भगवान शिव ने अंधकासुर का अंत करने का बीड़ा उठाया. लेकिन ब्रह्मा जी के वरदान के कारण उन्हें अंधकासुर से कड़ा संघर्ष करना पड़ा. तब भगवान शिव ने अपनी शक्तियों से योगेश्वरी को उत्पन्न किया, जिन्होंने अंधकासुर का नाश कर दिया. बता दें की योगेश्वरी के साथ आईं थीं 7 देवियाँ, जिन्हें सप्तमातृका कहा गया और वे सभी इसी स्थान पर सुइच्छा से वास करती हैं.

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गौरतलब है की हसनंबा मंदिर एक दैविक चमत्कार के कारण भारत में प्रसिद्ध हैं. बता दें की हिंदू पंचांग के अनुसार हर अश्विन मास के पहले गुरुवार को यह मंदिर एक सप्ताह के लिए ही श्रृद्धालुओं के लिए खोला जाता है, साल में केवल एक बार भक्तों के लिए इसे खोला जाता है. इसके बाद आखिरी दो दिनों में मंदिर में विशेष अनुष्ठान का आयोजन होता है, जिस दौरान मंदिर आम श्रृद्धालुओं के लिए बंद रहता है, इस दौरान मंदिर में एक दीपक जलाया जाता है और ताज़ा पुष्प व प्रशाद चढ़ाया जाता है. मंदिर को एक बाद पुनः भक्तों के लिए खोला जाता है, तब चमत्कारिक ढंग से दीपक जलता ही मिलता है, इसके अलावा पुष्प और प्रशाद भी ज्यों का त्यों प्राप्त होता है.

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