केरल

केरल की पिनाराई विजयन सरकार को हाई कोर्ट की फटकार सुनने को मिली है, दरअसल सरकार के एक निर्णय को लेकर कोर्ट ने आपत्ति जताते हुए आदेश रद्द कर दिया.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 28 मई शुक्रवार को केरल हाई कोर्ट ने राज्य के मुस्लिम और लैटिन कैथोलिक/धर्मांतरित ईसाइयों को 80:20 के अनुपात में छात्रवृत्ति देने की घोषणा वाले आदेश को रद्द कर दिया है. बता दें की जस्टिस शाजी पी चाली और चीफ जस्टिस मणिकुमार की पीठ ने आदेश को गलत बताते हुए कहा की “यह आदेश कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है, इसलिए राज्य में अधिसूचित सभी अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को योग्यता-सह-साधन स्कॉलरशिप मिले”.

जानकारियों के मुताबिक हाई कोर्ट (High Cort) ने अपने निर्णय में कहा की “हम राज्य सरकार को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पास उपलब्ध नवीनतम जनसंख्या जनगणना के अनुसार राज्य के भीतर अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को समान रूप से योग्यता-सह-साधन छात्रवृत्ति प्रदान करने के लिए आवश्यक और उचित सरकारी आदेश पारित करने का निर्देश देते हैं”. बता दें की इस मामले को लेकर कोर्ट में याचिका वकील जस्टिन पल्लीवाथुकल दायर करवाई थी.

याचिकाकर्ता वकील जस्टिन पल्लीवाथुकल ने आरोप लगाया की “राज्य सरकार राज्य में अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों के मुकाबले मुस्लिम समुदाय को अनुचित वरीयता दे रही है”. बता दें की कोर्ट ने इस केस की सुनवाई में इस बात को स्वीकारा की राज्य सरकार द्वारा समुदाय के कमजोर वर्गों को सुविधाएँ प्रदान करने में कुछ भी गलत नहीं है लेकिन जब अधिसूचित अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार करने की बात आती है तो उन्हें उनके साथ समान बर्ताव करना होगा.

कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा की “सरकार को अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करने का कोई अधिकार नहीं था, लेकिन यह एक ऐसा मामला है जिसमें राज्य के भीतर ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय के जनसंख्या अनुपात से उपलब्ध अधिकार को ध्यान में रखे बिना राज्य मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय को 80% छात्रवृत्ति प्रदान कर रहा है. यह असंवैधानिक है और किसी भी कानून द्वारा समर्थित नहीं है”.

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