हरि सिंह

जम्मू और कश्मीर में आजादी के बाद पहली बार आधिकारिक रूप से महाराजा हरि सिंह की जयंती गाजे-बाजे और लेहराते भगवा झंडों के बीच मनाई गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब भी सत्ताएँ बदली हैं तो उसका असर आवाम पर  भी पड़ा है। जन सामान्य में ये दिखाई देता है। जम्मू-कश्मीर में भी ऐसा ही हो रहा है। अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के बाद अब घाटी के प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि देश आजाद होने के बाद से पहली बार राज्य में महाराजा हरि सिंह की जयंती मनाई गई। इस दौरान सरकारी छुट्टी भी रही।

जम्मू-कश्मीरके उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने वार्षिक अवकाश का एलान किया। महाराजा की जयंती के कार्यक्रमों में भगवा पगड़ी, हाथ में तलवार दिल में जोश और बेहतर कल की आशा में भारी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए और महाराजा हरि सिंह को नमन किया। जम्मू के डोगरा और तवी ब्रिज में अलग-अलग संगठनों और आम लोगों ने भारी संख्या में इकट्ठा होकर ‘महाराजा हरि सिंह अमर रहे’के नारों की नारेबाजी की।

उल्लेखनीय है कि 23 सितंबर 1985 को महाराजा हरि सिंह का जन्म हुआ था और ये उनकी 127वीं जयंती है। इस मौके पर राज्य के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा,  “वह एक समाज सुधारक और उच्च आदर्शों वाले व्यक्ति थे।” वहीं जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने कहा “सच्चे दूरदर्शी, देशभक्त और जम्मू-कश्मीर के अंतिम डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह जी को आज उनकी जयंती पर नमन।”

महाराजा हरि सिंह के पोते और पूर्व विधायक युवराज विक्रमादित्य का कहना है कि लोगों को ये बात कभी नहीं भूलनी चाहिए कि महाराजा ने लोगों के हित में क्या-क्या किया था। साल 1961 में महाराजा की मृत्यु हुई थी, जिसके बाद से ही लोग उनकी जयंती के दिन को छुट्टी घोषित करने की माँग कर रहे थे। हालाँकि, तत्कालीन सरकारें तुष्टिकरण में इतनी व्यस्त थीं कि वो इस तरफ ध्यान ही नहीं दे पाईं।

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