हिजाब

हिजाब केस की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर से टिप्पणी की गई है कि स्कूलों को ड्रेस कोड तय करने का अधिकार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कर्नाटक हिजाब विवाद के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को एक तरह से मान्यता दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कहा कि स्कूलों के पास ड्रेस कोड तय करने का अधिकार है और इसे छीना नहीं जा सकता। हिजाब कोई ड्रेस कोड नहीं हो सकता है।

सु्प्रीम कोर्ट में हिजाब विवाद की सुनवाई जस्टिस हेमंत गुप्ता और सुधांशु धूलिया की बेंचन की ही। हिजाब का समर्थन कर रहे याचिकाकर्ताओं की तरफ से वामपंथी वकील प्रशांत भूषण, दुष्यंत दवे, मीनाक्षी अरोड़ा, ए एमआर दार, जयना कोठारी, कॉलिन गोंजाल्विस ने कोर्ट में अपनी-अपनी दलीलें रखीं। करीब चार घंटे तक चली बहस के दौरान प्रशांत भूषण ने बचकाना दलील देते हुए कोर्ट में दावा किया कि प्राइवेट स्कूलों, गोल्फ क्लब जैसे प्राइवेट क्लब ड्रेस कोड का पालन नहीं करने पर एंट्री को बैन कर सकते हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों के पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। ये अपने फैसलों को थोप नहीं सकते हैं।

भूषण की इस दलील पर जस्टिस हेमंत गुप्ता ने पूछा कि क्या वो ये कहना चाहते हैं कि सरकारी स्कूल ड्रेस कोड तय नहीं कर सकते हैं? अदालत के इस सवाल पर सकपकाए प्रशांत भूषण ने कहा कि अगर सरकारी स्कूलों के पास ड्रेस कोड तय करने का अधिकार है भी तो भी वे हिजाब को बैन नहीं कर सकते। हालाँकि, जस्टिस धुलिया ने उनकी इस दलील को नकार दिया।

मुस्लिम वकील ने कोर्ट को अल्लाह का डर दिखाया

सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील अब्दुल मजीद दार ने कोर्ट को ही अल्लाह का डर दिखा दिया। कुरान के तीसरे सूरे का हवाला देते हुए अब्दुल मजीद ने इस्लाम में पर्दा प्रथा को अनिवार्य करार दिया। उन्होंने दावा किया कि 1400 साल पहले कुरान आई थी। इसमें किसी भी तरह का संशोधन नहीं किया जा सकता। बचकाना बयान देते हुए मजीद ने दावा किया कि अगर हिजाब नहीं पहनेंगे तो अल्लाह माफ नहीं करेगा। इसके साथ ही वकील मजीद ने एक तरह की धमकी देते हुए कहा कि कयामत के दिन अल्लाह सबका हिसाब करेगा।

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