Milkha Singh

मिल्खा सिंह (Milkha Singh) अब हमारे बीच में नहीं रहे. उनका कोविड-19 की वजह से निधन हो गया. मिल्खा को लोग फ्लाइंग सिख के नाम से भी जानते हैं. मिल्खा सिंह (Milkha Singh) ने भारत को एशियाई खेलों में सोना जितवाया हैं.

Milkha Singh

देश ने अपना नायब हिरा खो दिया हैं. जब ये खबर बाहर आई की महान एथलीट मिल्खा सिंह नहीं रहे, जिसके बाद तो मानो पूरा देश स्तब्द रह गया हो. हर तरफ़ से मिल्खा के लिए प्रार्थनाएं और शांति संदेश आने लगे. राजनीतक गलियारे से लेकर सिनेमा जगत के सितारों ने भी मिल्खा को लेकर अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए नजर आए. मिल्खा सिंह का भूतकाल स्पोर्ट्स से जुड़ा हुआ है तो बहुत से दिग्गज खिलाडियों ने भी ट्विट करके फ्लाइंग सिख को श्रद्धान्जली दी. फ्लाइंग सिख का जीवन बहुत रोमांचक या रोचक तरीके का हैं. जहां पर वह अपने आधे परिवार को खोने के बाद, इतना टूटने के बावजूद स्पोर्ट्स के दिग्गज बने. तो आइए एक नजर मिल्खा सिंह या फ्लाइंग सिख के रोचक जीवनी पर.

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मिल्खा सिंह के जीवन से जुड़े रोचक तथ्य

मिल्खा सिंह का जन्म साल 1929 में पाकिस्तान के मुजफरगढ़ के गोविंदपुरा में हुआ था. इनका जीवन बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा. भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद इन्हें भारत आना पड़ा, लेकिन बंटवारे के बाद हुए दंगो के दौरान फ्लाइंग सिख ने अपने 14 में से आठ भाई बहनों और माता-पिता को खो दिया. भारत आने के बाद मिल्खा भारतीय सेना में भर्ती हुए, सेना में भर्ती होने के बाद इनका जीवन पूरी तरह बदलने लगा. मिल्खा सिंह जब सेना में थे तब एक क्रॉस-कंट्री रेस हुई, जिसमें 400 से अधिक सेनिकों ने हिस्सा लिया. उन मेसे एक फ्लाइंग सिख भी थे.

जो यह रेस जीत नहीं पाए लेकिन इन्होंने टॉप-10 में अपनी जगह जरुर बनाई. यह इस रेस में छःटे नंबर पर रहे. इसके बाद इन्हें ओलंपिक के लिए चुना गया. मिल्खा ने 3 ओलंपिक गेम्स में भाग लिया हैं. हालांकि फ्लाइंग सिंह ओलंपिक में तो देश को पदक नहीं दिला पाए. लेकिन एशियाई खेलों में इन्होंने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था. मिल्खा सिंह आखरी बार 1962 के एशियाई खेलों में बतोर खिलाड़ी खेले थे.

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By Sachin

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