जगन्नाथ मंदिर

कानपूर में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर की छत से तेज धुप में रहस्य ढंग से पानी टपकता है, जिसे देख कर वैज्ञानिक भी हैरान हो गए हैं.

भारत देश में अनेकों ऐसे मंदिर और धार्मिक स्थल ऐसे हैं जिकने चमत्कारिक दृश्य और पौरोणिक वास्तुकला का नजारा देश आज के युग के वैज्ञानिकों के लिए आश्चर्यजनक हो जाता है की ऐसा संभव कैसे हो पा रहा है, इसी सूचि में एक नाम है उत्तर प्रदेश के कानपूर जिले में भीतरगांव से 3 किलोमीटर की दुरी पर स्थित जगन्नाथ मंदिर. भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर में एक्सर घटित होने वाली घटना वास्तव में भी इतनी रहस्यमय है की वैज्ञानिकों के भी होश उड़ जाएं.

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जी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार कई बार वैज्ञानिक और पुरातत्‍व विशेषज्ञों ने मंदिर से गिरने वाली बूंदों की पड़ताल की, लेकिन सदियां बीत गई हैं इस रहस्‍य को मगर आज तक किसी को नहीं पता चल सका कि आखिर मंदिर की छत से टपकने वाली बूंदों का राज क्‍या है. बताया जाता है कि इस मंदिर का इतिहास 5 हजार साल पुराना है. इस मंदिर में भगवान जगन्‍नाथ, बलदाऊ और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं. इनके अलावा मंदिर में पद्मनाभम की भी मूर्ति स्‍थापित है. जैसी रथ यात्रा पुरी उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर में निकलती है वैसे ही रथ यात्रा यहां से भी निकाली जाती है. पुरातत्व के अधीन इस मंदिर का जीर्णोद्धार लगभग 11वीं शताब्दी के आसपास का बताया जा रहा है.

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बता दें की इस क्षेत्र के स्थानीय निवासियों का कहना है की सालों से वह मंदिर की छत से टपकने वाली बूंदों से ही मानसून के आने का पता करते हैं. कहा जाता है कि इस मंदिर की छत से टपकने वाली बूंदों के हिसाब से ही बारिश भी होती है. जगन्नाथ मंदिर के गुंबद से जब बूंदे कम गिरीं तो यह माना जाता है बारिश भी कम होगी. इसके उलट अगर ज्‍यादा तेज और देर तक बूंदे गिरीं तो यह माना जाता है कि बारिश भी खूब होगी. मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस बार बारिश कम होगी. क्योंकि दो दिन से छोटी बूंदे टपक रही हैं.

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