जम्भेश्वर मंदिर

मुकाम में स्थित ये भव्य देवधाम पूरी तरह सफेद संगमरमर से बना है, जम्भेश्वर मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित हैं और जाम्भोजी को विष्णु का अवतार भी माना गया है.

राजस्थान के बीकानेर जिले में नोखा तहसील के एक गांव मुकाम में बिश्नोई पंथ के संस्थापक गुरु जम्भेश्वर महाराज की समाधिस्थ पर ही उनका भव्य मंदिर भी स्थापित है. पूरी तरह से संगमरमर का बने होने के कारण यह मंदिर अत्यंत ही आकर्षक लगता है. जम्भेश्वर मंदिर विष्णु भगवान को समर्पित हैं. माना जाता है की गुरु जम्भेश्वर महाराज भगवान विष्णु के ही अवतार थे, जिन्होंने कलयुग में बढ़ते पाप को रोकने के लिए इस पवित्र धरा पर अवतार लिया.

प्रति वर्ष ही इस मंदिर में फाल्गुन और अश्विन मास की अमावस्या को मेला भरता है. मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं. बता दें की जम्भेश्वर महाराज को स्थानीय लोग जाम्भोजी भी कहते हैं. मेले वाले दिन सूर्य उदय के साथ शुरू हुई घी और खोपरों की महक ने हर किसी का ध्यान बरबस ही अपनी ओर खींचती हैं. गुरू जंभेश्वर भगवान की शब्दावाणी से शुरू हुआ हवन दिन चढ़ने के साथ – साथ बढ़ता जाता है. यहां पहुंचने वाले हर श्रद्धालु पहले गुरु महाराज की समाधिस्थल पर धोक लगाते हैं और फिर हवन कुंड के पास आकर घी और खोपरे की आहुती देते हैं.

मुकाम से मात्र 4 किलोमीटर की ही दुरी पर सराथल धोरे पर भी जाम्भोजी का मंदिर है और श्रद्धालु मुकाम मंदिर से समराथल तक पैदल ही जाते हैं. धोरे पर पाहल ग्रहण करना और जांभोजी नाडिया से मिट्‌टी धोरे तक लाना भी पूण्य माना जाता है. जब भी यहां मेला लगता है तो रक्तदान शिविर भी आयोजित किए जाते हैं. गुरु जम्भेश्वर महाराज द्वारा स्थापित बिश्नोई पंथ मानवता का एक दुर्लभ उदाहरण भी पेश करते हैं.

बता दें की गुरु जम्भेश्वर महाराज का जन्म विक्रमी संवत् 1508 सन 1451 भादवा वदी अष्टमी को वर्तमान नागौर के पिंपासर गांव में हुआ और उन्होंने सम्पूर्ण जीवन ने ब्रह्मचर्य का पालन किया. प्राप्त जानकारियों के अनुसार इन्होंने विक्रमी संवत् 1542 सन 1485 मे बिश्नोई पंथ की स्थापना की. ‘हरि’ यानि विष्णु नाम का वाचन किया करते थे. गुरु जम्भेश्वर का मानना था कि भगवान सर्वत्र है. वे हमेशा पेड़ पौधों वन एवं वन्यजीवों सभी जानवरों पृथ्वी पर चराचर सभी जीव जंतुओं की रक्षा करने का संदेश देते थे. उन्होंने जात पात, छुआछूत, स्त्री पुरुष में भेदभाव, जीव हत्या पेड़ पौधों की कटाई, नशे पत्ते जैसी सामाजिक कुरीतियों को दूर किया व स्वच्छता को बढ़ावा दिया. वे जीव हत्या को पाप मानते थें और शुद्ध शाकाहारी भोजन खाने कि बात समझाते थें.

गुरु जम्भेश्वर महाराज द्वारा स्थापित बिश्नोई पंथ के उनके बताए 29 नियमों का पालन भी करते हैं. इस पंथ के लोग पर्यावरण और जीवों से अत्यंत प्रेम भी करते हैं और इसी कारण कभी मांस का सेवन नहीं करते. पर्यावरण प्रेम में लीन अमृता देवी बिश्नोई ने पैडों के लिए स्वयं को पहले कटवाया और केवल एक काला हिरण की हत्या के इसी पंथ के लोगों ने सलमान खान को भी कोर्ट में चक्कर लगाने के लिए मजबूर कर दिया.

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