जम्बुकेश्वर मंदिर

1800 वर्ष पुराने जम्बुकेश्वर मंदिर में पुजारी स्त्रियों के जैसे कपड़े पहन कर भगवान शिव की पूजा करते हैं, यह शिवालय पंच महाभूत स्थल में से एक हैं.

भगवान शिव को आपने अलग – अलग रूप में तो पूजे जाते हुए आपने बहुत बार देखा होगा, लेकिन क्या कभी आपने भगवान शिव की पूजा करने वाले को अलग रूप धारण करते देखा है? लेकिन ये सच है, तमिलनाडू के तिरुचिरापल्ली में स्थित तिरुवनैक्कोइल मंदिर जिसे जम्बुकेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. इस मंदिर में पुजारी दोपहर की पूजा स्त्रियों के समान ही वेशभूषा बनाकर पूजा करते हैं. यह दिव्य मंदिर पंच महाभूत स्थल में से एक हैं, पंच महाभूत स्थलों का बारह ज्योतिर्लिंगों के समान ही महत्व माना जाता है.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक जम्बुकेश्वर मंदिर का प्राचीन एवं पौराणिक इतिहास है. इस स्थान पर माता पार्वती ने देवी अकिलन्देश्वरी के रूप में भगवान शिव की तपस्या की, उन्होंने कावेरी नदी के जल से लिंगम का निर्माण किया, यही कारण है कि इसे ‘अप्पू लिंगम’ कहा जाता है. चूँकि देवी ने लिंगम की स्थापना एक जम्बू वृक्ष के नीचे की अतः यहाँ भगवान शिव को जम्बुकेश्वर के नाम से जाना गया. बता दें की देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें इसी स्थान पर दर्शन दिया और शिव ज्ञान का बोध कराया.

गौरतलब है की भगवान शिव को महाभूत स्थलों में से यह स्थान जल को समर्पित हैं, अन्य चार पृथ्वी, अग्नि, वायु और आकाश को समर्पित हैं. बता दें की इन्हीं पंचतत्वों के स्वामी के रूप में भगवान शिव को समर्पित पाँच मंदिरों की स्थापना दक्षिण भारत के पाँच शहरों में की गई है. बताया जाता है की इस मंदिर का निर्माण आज से लगभग 1800 साल पहले चोल राजा कोकेंगनन द्वारा कराया गया था, मगर कई मान्यताओं के मुताबिक मंदिर को इससे भी पहले का माना जाता है.

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