मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जम्मू कश्मीर में रोहिंग्या मुसलमानों को मदरसों और मस्जिदों में शरण दी जाती, बाद में उन्हें कट्टर जिहादी भी बनाया जाता है.

जिहादी

भारत के जम्मू कश्मीर में जे. एंड के. पुलिस द्वारा रोहिंग्या सर्च अभियान ज़ोर पकड़े हुए हैं, जानकारी की माने तो राज्य में कुल रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों समेत 13,700 से भी अधिक विदेशी बसे होने का अंदाजा लगाया जा रहा है.

यदि केवल जम्मू के 39 केम्पों की बात करें तो इन केम्पों में रोहिंग्या मुसलमानों की संख्या 6,523 से ज्यादा है और बताया जा रहा है की सांबा में भी ये लोग फैले हुए हैं. मीडिया की जानकारियों के अनुसार अब तक पुलिस द्वारा 168 से भी अधिक रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान की गई है.

मदरसों और मस्जिदों में मिली शरण

कई समाचार एजेंसीयों के द्वारा इन सब को एक साजिश का नाम भी दिया जा रहा है, उनके मुताबिक म्यांमार और बंगलादेश के रोहिंग्या मुसलमान बंगलादेश के रास्ते से ही सबसे पहले कोलकता में पहुंचते और फिर मालदा लाकर वहां से सीधे इन्हें जम्मू और कश्मीर के लिए भेज दिया जाता है.

बाद में संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं द्वारा इन सब का पंजीकरण करवाया जाता है, फिर इन लोगों को विश्वाश दिलाया जाता है की उन्हें जम्मू कश्मीर में कोई दिक्कत नहीं आएगी क्योंकि यह एक मुस्लिम बहुल इलाका है. जम्मू के मदरसों और मस्जिदों में इनके रहने खाने की व्यवस्था की जाती है और शरण भी दी जाती है.

कट्टर जिहादी बनाने की साजिश

एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार इन सब ताम झाम केवल एक ही मकसद के लिए किया जाता है, ताकि इन लोगों को कट्टर जिहादी बनाया जा सके. गोरतलब है इन लोगों की झुग्गियां उन्हीं इलाकों में बनाई जाती है जहां मुसलमानों की जनसंख्या थोड़ी कम हो.

बाद में उन्हें जम्मू और कश्मीर में चल रहे ‘जिहाद’ और म्यांमार में ‘बौद्धों के अत्याचार’ को जोड़ कर ओर ज्यादा कट्टर बनाया जाता है, उनसे कट्टर बातें कर के जिहादी तत्वों के लिए काम करने के लिए तैयार भी किया जाता है.

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