कोरोना वायरस

कोरोना वायरस ने के कारण हुआ हिंदू धर्म के सबसे बड़े मेले का अंत. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आग्रह के बाद आज सुबह कुंभ मेले के आयोजकों के 17 अखाड़ो मेसे 2 अखाड़ो ने इसके समापन की घोषणा की और शाम तक जूना अखाड़ा ने भी इसे समाप्त करने की घोषणा कर दी हैं.

कोरोना वायरस

हरिद्वार में चल रहे कुंभ मेले में 17 अखाड़ों के साधुओं ने हिस्सा लिया. जिनमें से 13 अखाड़ों के साधुओं में बहुत तेजी से कोरना वायरस का विस्फोट हुआ. जिसके बाद स्वयं देश के प्रधानमंत्री को इस पर ट्विट करके अखाड़ों से निवेदन करना पड़ा की इस बार के कुंभ मेले को समय से पहले समाप्त किया जाए. इस अपील के बाद एक-एक अखाड़ा कुंभ के मेले की समापन की घोषणा करते जा रहे हैं. जहां आपको बता दें की अखाड़ों के प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निवेदन के बाद एक आपातकालीन बैठक का आयोजन किया, जिसमें अखाड़ों ने यह फैसला लिया की इस बार कुंभ मेले को समय से पहले ही समाप्त करना होगा.

कोरना वायरस पर चर्चा के लिए रखी गई इस बैठक के बाद स्वामी अवधेशानंद ने कहा ‘कि भारत की जनता व उसकी जीवन रक्षा हमारी पहली प्राथमिकता हैं. कुंभ में कोरोना के तेजी से बढ़ रही रफ्तार को देखते हुए हमने विधिवत कुम्भ के आवाहित समस्त देवताओं का विसर्जन कर दिया हैं. जूना अखाड़ा की ओर से यह कुंभ का विधिवत विसर्जन-समापन हैं’. आपको बता दें की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन अखाड़ों से निवेदन से पहले आम जनता से भी निवेदन किया की ‘अब कुंभ को प्रतीकात्मक ही रखा जाए’. प्रधानमंत्री ने यह निवेदन तब किया जब हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं में कोरोना संक्रमण की खबरें आ रही थी. उस वक्त प्रधानमंत्री की अपील के बाद महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद ने कहा था कि ‘कुंभ अभी समाप्त नहीं हुआ हैं. उन्होंन अपील की थी कि बुजुर्ग और बच्चे शाही स्नान में न आएं. संत समाज बैरागियों के साथ हैं, उनके स्नान होने चाहिए. उन्होंने कहा कि कुंभ समाप्त नहीं होगा, हम आग्रह करते हैं कि श्रद्धालु कम संख्या में आएं’.

कोरोना वायरस का प्रकोप भारत देश में पिछले साल से भी ज्यादा हो रहा हैं. जिसको काबू करने के लिए सरकार और जनता अपनी-अपनी तरफ़ से भरपूर प्रयास कर रहे हैं.

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