ज्वाला देवी मंदिर

कांगड़ा जिले में स्थापित ज्वाला देवी मंदिर में 9 अद्भुत ज्योति अनंत काल से आज तक प्रज्वलित हो रही है, मुगल शासक अकबर भी इसे नहीं भुजा सका था.

भगवान और उनके अलग – अलग स्वरूपों ने समय समय पर संसार में कुछ ऐसे चमत्कार किए हैं जिन्हें आधुनिक विज्ञान भी आज तक समझ नहीं पा रहा है. ऐसा ही एक चमत्कार हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले के ज्वाला देवी मंदिर में देखने को मिलता है. यहां कुछ 9 अमर ज्योति का संगम है जो आदि काल से अब तक संसार को प्रकाशित कर रही है. हिंदू घृणा वाला मुगल शासक अकबर ने भी इन्हें पानी और लोहे के तवे से नष्ट करने की कोशिश करी थी, मगर मुंह की खानी पड़ी.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक आदि काल में जब माता सती ने अपने पिता प्रजापति दक्ष से क्रोधित होकर अपने शरीर को अग्नि को समर्पित कर दिया था, इसके बाद उनके पति महादेव शिव अत्यंत क्रोधित हुए और माता सती की जली हुई देह को गोद में लेकर चले गए. उनके क्रोध को शांत करने के भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता के देह को 51 भागों में विभाजित कर दिया और प्रत्येक अंग धरती पर जहां भी गिरा वह स्थान एक शक्तिपीठ कहलाया, जिनमें से माता सती की जीभ इसी स्थान पर आके गिरी थी.

बताया जाता है की जीभ के अलावा माता सती की दिव्य ज्योति भी इसी स्थान पर आई थीं, जिस कारण यहां माता के 9 अलग – अलग स्वरूपों को समर्पित 9 दिव्य ज्योति प्रज्वलित होने लगी. ज्वाला देवी मंदिर में सबसे बड़ी ज्योति माता ज्वाला देवी की हैं और उनके साथ माँ अन्नपूर्णा, माँ विध्यवासिनी, माँ चण्डी देवी, माँ महालक्ष्मी, माँ हिंगलाज माता, माँ सरस्वती, माँ अम्बिका देवी एवं माँ अंजी देवी की भी ज्योति अनन्तकाल से प्रज्वलित होती आ रही हैं. इस मंदिर का वर्णन महाभारत के अलावा अन्य हिंदू ग्रन्थों में भी मिलता हैं. गौरतलब है की हिंदू घृणा वाले मुगल शासक अकबर ने भी इन ज्योति को भुझाने का प्रयास किया था, उसने पहले इन पर पानी डाला और फिर लोहे के तवे को भी इन पर रखा मगर फिर भी वो हार गया और ये चमत्कार देख यहां से भाग गया.

इसे भी जरुर ही पढिए:-

दक्षिणेश्वर काली मंदिर: माता के आदेश पर एक विधवा ने बनवाया मंदिर

Leave a Reply

%d bloggers like this: