वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं, इसे अंतिम बार 2 सितंबर 1669 औरंगजेब के आदेश पर ध्वस्त किया गया.

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद पर हाल ही में वाराणसी कोर्ट ने फैसला सुनाया है. अपने फैसले में कोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं की वो 5 जनों की ASI टीम का गठन करें और मस्जिद का सर्वेक्षण कराएं, ताकि ज्ञात हो सके की यहाँ पहले मंदिर था अथवा नहीं?

काशी विश्वनाथ

काशी विश्वनाथ मंदिर का संपूर्ण इतिहास

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक हैं काशी विश्वनाथ मंदिर, यह मंदिर हजारों वर्ष प्राचीन होने के भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में भी इनका नाम शामिल है. माना जाता है की भगवान शिव ने स्वयं यहां ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी, जिसके बाद से यह स्थान एक पवित्र स्थल बन गया और काशी विश्वनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ.

यह मंदिर गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है और ये भी माना जाता है की यह मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती का आदि स्थान है. काशी विश्‍वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्‍ट स्‍थान है। ऐसा माना जाता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्‍नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती हैं.

औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त कराया

पवित्र होने के साथ साथ इस मंदिर को विदेशी आक्रान्ताओं की मार भी झेलनी पड़ी. चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने हजारों वर्ष पूर्व में यहां एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था, जिसे विदेशी हमलावर मोहम्मद गौरी ने तुड़वा दिया. बाद में इसे जौनपुर के सुल्तान महमूद शाह ने 1444 में तुड़वाया.

राजा टोडरमल की सहायता से पंडित नारायण भट्ट ने वर्ष 1585 में मंदिर का पुननिर्माण करवाया. बाद में मुगल बादशाह औरंगजेब ने 18 अप्रैल 1669 को इसे ध्वस्त करने का आदेश जारी किया और 2 सितंबर 1669 को बादशाह की सेना ऐसा करने में कामयाब भी हो गई.

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By Sachin

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