कैलाशनाथ मंदिर

कांचीपुरम में स्थित कैलाशनाथ मंदिर अपनी भव्यता के कारण ‘कांची का महान रत्न’ भी कहलाने लगा, यह मंदिर भगवान शिव को ही समर्पित हैं.

सनातन धर्म को मानने वालों के लिए कांचीपुरम सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक हैं, इसे मंदिरों की नगरी भी कहा जाता है. इस नगर में बहुत से प्रसिद्ध मंदिर हैं जिनमें से ही एक हैं कैलाशनाथ मंदिर. कैलाशनाथ मंदिर को इसकी भव्यता और दिव्यता के कारण ‘कांची का महान रत्न’ भी कहा जाता है. क्योंकि यह मंदिर कोई समान्य मंदिर नहीं है, बल्कि भगवान शिव को समर्पित 1300 सालों पुराना व सुंदर वास्तुकला से सजा हुआ शिवालय हैं.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण भगवान शिव, भगवान विष्णु, देवी, सूर्य, गणेश जी और कार्तिकेय की उपासना करने के लिए बनाया गया था. कांचीपुरम, पल्लव वंश के शासकों की राजधानी हुआ करती थी. कैलाशनाथमंदिर का निर्माण भी पल्लव वंश के राजाओं द्वारा किया गया था. बता दें की मंदिर का निर्माण 7वीं – 8वीं शताब्दी के दौरान पल्लव राजा महेंद्रवर्मन द्वितीय ने कराया था. इसके अलावा महेंद्रवर्मन तृतीय के द्वारा भी मंदिर के सम्मुख भाग और गोपुरम के निर्माण की जानकारी मिलती है.

गौरतलब है की कैलाशनाथ मंदिर बृहदेश्वर और विरुपाक्ष जैसे जिन मंदिरों को स्थापत्यकला का बेजोड़ नमूना माना जाता है, वो मंदिर भी कैलाशनाथ मंदिर की प्रेरणा से बनाए गए. बताया जाता है की कैलाशनाथ संभवतः दक्षिण भारत का ऐसा मंदिर है जिसमें पत्थरों के टुकड़ों को आपस में जोड़कर बनाया गया है, इसके अलावा कम से कम 58 छोटे – बड़े मंदिरों का निर्माण भी कैलाशनाथमंदिर के मुख्य मंदिर परिसर के बिच किया गया है. इसके अलावा इस मंदिर के आधार का निर्माण ग्रेनाइट से हुआ है और मंदिर का निर्माण सैंडस्टोन से और मंदिर के प्रवेश द्वार पर बनी दीवार पर 8 तीर्थ क्षेत्र हैं.

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