कामाख्या मंदिर

गुवाहाटी में स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या मंदिर में माता की पूजा नवरात्रों के 9 दिनों तक नहीं बल्कि सदियों से 15 दिनों तक की जाती आ रही है.

भारत और उसके आस – पास के क्षेत्रों में देवी आदि शक्ति को समर्पित कुछ 51 शक्तिपीठ स्थापित हैं, इन्हीं शक्तिपीठों में से एक हैं कामाख्या मंदिर. कामाख्या मंदिर असम की राजधानी गुवाहाटी की नीलांचल की पहाड़ियों पर स्थित हैं. अपनी अद्भुत और पवित्र परम्पराओं के कारण इस मंदिर की प्रसिद्धि पुरे देश भर में विख्यात हैं. माता के इस मंदिर में सबसे आकर्षक हैं माता की पूजा विधि, इसे ‘पखुवापूजा’ भी कहा जाता है और यह 9 दिनों बजाए 15 दिनों तक उत्सव के समान चलती हैं.

कामाख्या मंदिर में मुख्य पूजा और माँ दुर्गा की भक्ति के अधिकांश कार्य बंद दरवाजों के अंदर किए जाते हैं, 15 दिनों की पूजा आराधना के समय मंदिर के दरवाजे श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं. यह माता का ऐसा मंदिर हैं जहां उनकी कोई भी मूर्ति विराजमान नहीं है, बल्कि उसके स्थान पर एक शंकु आकृति सुशोभित हैं. बता दें की इस शंकु की लंबाई 9 इंच और चौड़ाई 15 इंच है. गौरतलब है की चैत्र नवरात्रों के समय भी मंदिर में भक्तों की खूब भीड़ देखने को मिलती हैं और इस वर्ष तो उद्योग्पति अनिल अंबानी भी यहां देवी मां के दर्शन और पूजा अर्चना करने आए थे.

बता दें की समान्य तौर पर पखुवापूजा का पर्व का आयोजन अश्विन माह (सितंबर मध्य से अक्टूबर मध्य) में चंद्रमा के घटने के नवें दिन यानी ‘कृष्ण नवमी’ पर होती है और इसका समापन चंद्रमा के बढ़ने के नवें दिन यानी ‘शुक्ल नवमी’ पर होता है. दैनिक जागरण की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक कामाख्या मंदिर विश्व का सर्वोच्च कौमारी तीर्थ भी माना जाता है. इसीलिए इस शक्तिपीठ में कौमारी-पूजा अनुष्ठान का भी अत्यन्त महत्व है. यहां आद्य-शक्ति की प्रतीक सभी कुल व वर्ण की कौमारियाँ होती हैं. किसी जाति का भेद नहीं होता है. इस क्षेत्र में आद्य-शक्ति कामाख्या कौमारी रूप में सदा विराजमान रहती हैं.

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