करमनघाट मंदिर

प्राचीन भाग्यनगर यानि वर्तमान हैदराबाद में स्थित है हनुमानजी का करमनघाट मंदिर. यहां बजरंग बली की विशेष पूजा मंगलवार के बजाए रविवार को होती हैं.

श्री राम प्रभु के परम भक्त हनुमानजी के यूं तो देश में बहुत से प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन हैदराबाद में स्थित करमनघाट मंदिर उन सभी बजरंगी मंदिरों से इसलिए भिन्न हैं क्योंकि यहां उनकी विशेष पूजा मंगलवार को नहीं रविवार को होती है. बता दें यह मंदिर हैदराबाद के सबसे पुराने मंदिरों में से एक हैं. गोरतलब है की इस मंदिर को आलमगीर ओरंगजेब जैसे विदेशी आक्रमणकारी ने भी तोड़ने की कौशिश की थी, मगर हनुमानजी के चमत्कार के कारण वह बिलकुल असफल रहा और उसे भागना पड़ा.

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तेलंगाना टूरिज्म की एक रिपोर्ट के मुताबिक 12वीं शताब्दी यानि सन् 1143 के आसपास के समय काकतीय वंश के राजा प्रोला द्वितीय जी जंगल में शिकार के लिए गए हुए थे. जब वह थक गए तो उन्होंने एक पेड़ के नीचे विश्राम करने का निर्णय लिया, विश्राम के दौरान उन्होंने जंगल में भगवान राम का जाप सुना. राजा प्रोला द्वितीय जी को अत्यंत ही आश्चर्य और हैरानी हुई की इस घने जंगल में भी ऐसा कौन है जो भगवान राम का जाप कर रहे हैं. जब राजा उस स्थान पर पहुँचे तो उन्हें वहां हनुमान जी की एक अद्भुत बैठी हुई प्रतिमा दिखाई दी, इसी प्रतिमा के भीतर से भगवान राम के जाप की आवाज सुनाई दे रही थी. इसके बाद राजा अपनी राजधानी लौट आए और उन्होंने हनुमान जी का यहां मंदिर बनाने का निर्णय लिया और करमनघाट मंदिर का निर्माण करवाया.

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विक्कीपीडिया की जानकारी के अनुसार कर्माघाट हनुमान मंदिर भारत के तेलंगाना राज्य में हैदराबाद में सबसे पुराने और लोकप्रिय हिंदू मंदिरों में से एक है. मंदिर के प्रमुख देवता भगवान हनुमान हैं और मंदिर परिसर में अन्य देवताओं का निवास भी है, भगवान राम, भगवान शिव, देवी सरस्वती, देवी दुर्गा, देवी संतोषीमाता, भगवान वेणुगोपाल स्वामी और भगवान जगन्नाथ.

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