खीर भवानी माता मंदिर

जम्मू कश्मीर में स्थित मां दुर्गा को समर्पित खीर भवानी माता मंदिर के भीतर के जल कुंड का रंग रहस्यमय ढंग से शुभ और अशुभ का संकेत देता है.

भारत में अनेकों दिव्य और रहस्यों भरे मंदिरों का भंडार हैं, उनमें से ही एक मंदिर हैं खीर भवानी माता मंदिर. यह मंदिर मां दुर्गा को समर्पित हैं और जम्मू कश्मीर गान्दरबल ज़िले में तुलमुला गाँव में एक पवित्र पानी के चश्मे के ऊपर स्थित हैं. मंदिर की प्रसिद्धि का मुख्य कारण परिसर के जल कुंड के पानी के बदलते को माना जाता है. यह जल क्षेत्र में कुछ विपत्ति का पूर्व से ही संकेत देता है और जब प्रदेश में ‘अनुच्छेद 370’ को हटाया गया था तब जल ने रंग बदलकर शुभ संकेत दिए थे.

ऑपइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार अपने जीवन काल में लंका पति रावण मां दुर्गा के परम भक्त थे, पौरोणिक कथाओं के मुताबिक रावण ने अपनी तपस्या और साधना से माता को प्रसन्न किया था. किन्तु जब रावण अपने अहंकारवश बुरे कामों में लीन हो गया तो माता उससे नाराज रहने लगीं और दुर्गा माता रावण से तब पूरी तरह रुष्ट हो गईं जब उसने माता सीता का अपहरण कर लिया. उसी दौरान माता सीता की तलाश में जब हनुमान जी लंका पहुँचे तो माता खीर भवानी ने हनुमान जी से कहा कि “वो उन्हें किसी दूसरी जगह ले चलें”. माता के आदेश का पालन करते हुए हनुमान जी माता की प्रतिमा को लंका से ले आए और उन्हें जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से 14 किमी दूर तुलमुल गाँव में स्थापित कर दिया.

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बता दें की यहां के स्थानीय निवासी दुर्गा मां को राग्या देवी के नाम से जानते हैं. माता को खीर सर्वाधिक प्रिय हैं और श्रद्धालु भी यहां माता को खीर का प्रसाद ही अर्पण करते हैं, कदाचित इसी कारण इनका नाम खीर भवानी माता कहा जाता हैं. प्रति वर्ष इस मंदिर में पारम्परिक रूप से माता खीर भवानी के दरबार में मेला भी लगता है और श्रद्धालु माँ दुर्गा के मंत्रोच्चार के बीच माता खीर भवानी के दर्शन करते हैं.

विक्की पीडिया की जानकारियों के मुताबिक खीर भवानी भवानी देवी का एक नाम है जिनका प्रसिद्ध मंदिर जम्मू और कश्मीर के गान्दरबल ज़िले में तुलमुला गाँव में एक पवित्र पानी के चश्मे के ऊपर स्थित है. यह श्रीनगर से 14 किमी पूर्व में स्थित है, खीर भवानी देवी की पूजा लगभग सभी कश्मीरी हिन्दू और बहुत से ग़ैर-कश्मीरी हिन्दू भी करते हैं. पारंपरिक रूप से वसंत ऋतू में इन्हें खीर चढ़ाई जाती थी इसलिए इनका नाम ‘खीर भवानी’ पड़ा. इन्हें असली में महारज्ञा देवी के नाम से जाना जाता है. कश्मीरी हिन्दू अक्सर प्रातःकाल में मंत्रोच्चारण करते हुए इनका स्मरण करते हैं, वह मंत्र ‘नमस्ते शारदा देवी, कश्मीर पुर्वासिनी, प्रार्थये नित्यं विद्या दानं च दे ही मे’ इस मंत्र का अर्थ यह है की ‘हे शारदा देवी, कश्मीर में रहने वाली, मैं प्रार्थना करता हूँ कि मुझे विद्या दान कर’.

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By Sachin

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