भगवान शिव

भगवान विष्णु के भांति भगवान शिव ने अनेकों अवतारों लिए हैं, महादेव के कुल 19 प्रमुख अवतारों वर्णन सनातन वैदिक धर्म के पौरोणिक ग्रन्थों में मिलता है.

आपने भगवान विष्णु के अनेकों अवतारों के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन क्या आप ये जानते हैं? की महादेव शिव ने भी समय – समय इस धरती पर अवतार लिए हैं. सनातन वैदिक धर्म के कई पौरोणिक ग्रन्थों में इनका वर्णन भी मिलता है. शिव पुराण के मुताबिक भगवान शिव के अनेकों अवतारों में से प्रमुख अवतार 19 है. आइए आप और हम मिलकर जानते हैं इन अवतारों के नाम व इनकी उत्पत्ति के कारण के विषय में:-

  • शरभ अवतार: भगवान शिव का आधा रूप हिरन और आधा रूप शरभ पक्षी का था, इन्होंने ही भगवान नरसिंह के क्रोध को शांत किया था.
  • पिप्पलाद अवतार: शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए इनकी पूजा की जाती है, प्राचीन काल में इन्होंने शनि देव को श्राप दे दिया था लेकिन बाद में उन्हें क्षमा भी कर दिया.
  • नंदी अवतार: शिलाद मुनि को महादेव ने पुत्र के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया और उन्हें भूमि से उत्पन्न एक बालक मिला, जिसे बाद में शिव जी गणाध्यक्ष भी बनाया.
  • भैरव अवतार: महादेव के इसी अवतार ने ब्रह्मा जी के पांचवें सर को अपने नाख़ून से काटा था, जिसके बाद वे काशी में आकर अपने आप को ब्रह्महत्या के पापा को मुक्त किया.
  • अश्व्थामा: महाभारत युद्ध के बाद जीवित बचे योद्धा और महागुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्व्थामा को भी महादेव का अवतार माना जाता है, ये अमर हैं.
  • वीरभद्र अवतार: माता सती अग्नि स्नान के बाद क्रोधित होकर महादेव ने वीरभद्र को उत्पन्न किया और उन्होंने प्रजापति दक्ष का सर काटकर उसी के हवन कुंड में गिरा दिया.
  • गृहपति अवतार: विश्वानर नाम के एक मुनि और उनकी पत्नी शुचिष्मती को महादेव वरदान के कारण पुत्र रूप में प्राप्त हुए, उनका गृहपति नाम ब्रह्माजी ने रखा था.
  • ऋषि दुर्वासा अवतार: सती अनुसूइया और महर्षि अत्रि ने पुत्र प्राप्ति के लिए घोर तपस्या करी, इससे प्रसन्न होकर त्रिदेवों ने उन्हें पुत्र के रूप में जन्म प्राप्त होने का वरदान दिया. जिनमें से महादेव के अवतार ऋषि दिर्वासा हुए.
  • हनुमान अवतार: भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी को भी महादेव शिव का अवतार ही माना जाता है.
  • वृषभ अवतार: महादेव ने ये भगवान विष्णु के पुत्रों से धरती की रक्षा करने के लिए था.
  • यतिनाथ अवतार: यह अवतार उन्होंने अपने एक भक्त की परीक्षा लेने के लिए लिया था और इस दौरन उस भक्त की मृत्यु भी हो चुकी थी.
  • कृष्ण दर्शन अवतार: महादेव ने इस अवतार में यज्ञ आदि धार्मिक कार्यों के महत्व को समझाया है, इस तरह ये अवतार पूर्णतः धर्म का प्रतीक है.
  • अवधूत अवतार: यह अवतार भगवान शिव ने देवराज इंद्र का अहंकार तोड़ने के लिए लिया था.
  • भिक्षुवर्य अवतार: एक अनाथ बालक को जीवन दान देने के लिए महादेव ने यह अवतार लिया और उस बालक को एक भिखारिन को सौंपा.
  • किरात अवतार: पांडवों के वनवास के दौरान महादेव किरात अवतार लेकर अर्जुन को पाशुपतास्त्र सौंपा और उसे अपने वास्तविक दर्शन भी दिए.
  • सुनटनतर्क अवतार: माता पार्वती के पिता को प्रसन्न करने के लिए महादेव जी सुनटनतर्क अवतार लिया और वे अपने मन्तव्य में सफल भी हुए.
  • ब्रह्मचारी अवतार: माता पार्वती की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ने यह अवतार लिया, लेकिन परीक्षा में माता पार्वती ने महादेव को निराश नहीं किया.
  • अर्धनारेश्वर अवतार: इस अवतार के जरिए महादेव ने संसार को यह संदेश दिया की यह प्रकृति और सृष्टि शक्ति अर्थार्त नारी के बिना अधूरी है.
  • सुरेश्वर अवतार: यह अवतार उन्होंने एक छोटे बालक उपमन्यु की तपस्या से प्रसन्न होकर लिया था, और उसे अपने परम भक्त का दर्जा भी दिया था.

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