कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर

केरल के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर में देवीं मां को प्रसन्न करने के लिए भक्त खुद के खून से ही होली खेलते हैं.

भारत में चमत्कारी और रहस्यमय मंदिरों की कोई कमी है, ऐसा ही एक मंदिर दक्षिण भारत के केरल में स्थापित हैं जिसे कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर कहा जाता है. कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर देवी मां भद्राकाली को समर्पित हैं. यहां अचंभित और आश्चर्य में डाल देने वाली भक्ति का अद्भुत और दुर्लभ नजारा देखने को मिलता है. साल में एक बार ही यहां भरणी त्यौहार का आयोजन होता है, भरणी त्यौहार के दौरान देवी माता के सभी भक्त मंदिर में अपने ही खून से होली खेलते हैं.

नवभारत टाइम्स की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में प्रसिद्ध भरणी त्यौहार का आयोजन मलयालम महीने ‘मीनम’ यानी मार्च-अप्रैल के बीच में ही किया जाता है. कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर यह उत्सव 7 दिनों तक चलता है. इस दौरान देवी मां को प्रसन्न करने के लिए उनके भक्त खून की होली खेलते हैं. बताया जाता है की त्यौहार के 7 दिनों बाद मंदिर सात दिनों तक बंद रहता है, इन दिनों में मंदिर में फैले खून को साफ़ किया जाता है.

पौरोणिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर भगवान शिव का मंदिर हुआ करता था, लेकिन बाद में भगवान परशुराम ने शिव मंदिर के बगल में ही देवी मां भद्राकाली की प्रतिमा स्थापित कर दी. कुछ मान्यताओं में तो यह भी बताया जाता है की कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर का निर्माण कन्नकी के राजा शेरा ने करवाया था. केवल इतना ही नहीं, इन सब के अलावा एक ओर अद्भुत रहस्य मंदिर स्वयं में छुपाया हुआ है. यहां रहने वाले लोगों का कहना है की प्राचीन काल में राजघराने की एक महिला यहां पर पूजा करने आई और एक विचित्र घटनाक्रम के बाद वह देवी की मूर्ति में ही समा गई.

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