कृष्ण जन्भूमि मंदिर

मथुरा में स्थापित कृष्ण जन्भूमि मंदिर भगवान श्रीकृष्ण की वास्तविक जन्मस्थली के ठीक पास में ही स्थापित हैं और इस इतिहास में कई बार ध्वस्त किया जा चूका हैं.

इतिहासकारों के मुताबिक मथुरा में स्थित कृष्ण जन्भूमि मंदिर अपने वास्तविक स्थान पर नहीं बल्कि उसके पास स्थापित हैं, कृष्ण जी के जन्म स्थली पर शाही ईदगाह स्थापित हैं और यही कारण है की यह स्थान फ़िलहाल विवादित जमीन भी बनी हुई है. भगवान श्रीकृष्ण का जन्म सदियों पहले भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन कंस के कारागार में हुआ और उनकी स्मृति में उनके प्रपौत्र व्रजनाभ ने सबसे पहले उसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर बनवाया.

लेकिन सब को पता है की हिंदू धार्मिक स्थलों को इतिहास में विदेशी आक्रांताओं ने जब – जब मौका मिला तब – तब तोड़ दिया. लेकिन हर बार हिंदू शासकों ने इसे दौबारा बनवाया. महाक्षत्रप सौदास के समय के एक शिलालेख से ज्ञात होता है कि किसी ‘वसु’ नामक व्यक्ति ने यह मंदिर 80-57 ईसा पूर्व बनाया. इसके बाद मंदिर को चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य द्वारा सन में बनवाया गया. श्रीकृष्ण के इस भव्य एवं दिव्य मंदिर का इतिहास पिछले दो हजार साल में काफी उतार-चढ़ाव का रहा है.

इस्लामिक विदेशी आक्रांता व लुटेरा महमूद गजनवी भगवान श्री कृष्ण के भव्य मंदिर को देख आश्चर्य चकित हो गया था और मंदिर को लुटकर उसे तुड़वा दिया. इसके बाद सिकंदर लौधि ने 16 वीं शताब्दी में इसे नष्ट करवाया था. ओरछा के शासक राजा वीरसिंह जू देव बुन्देला ने पुन: इस खंडहर पड़े स्थान पर एक भव्य और पहले की अपेक्षा विशाल मंदिर बनवाया, बताया जाता है की यह मंदिर आगरा से भी दिखाई देता था. बाद में मुगल शासकों ने 1669 में इसे तुड़वाकर इस मंदिर के स्थान पर शाही ईदगाह बनवा दी. इसी ईदगाह के पीछे ही महामना पंडित मदनमोहन मालवीयजी की प्रेरणा से पुन: एक मंदिर स्थापित किया गया है, जो की वर्तमान में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है परन्तु ये अपने वास्तविक स्थान पर नहीं है और तब से लेकर अब तक यह भूमि विवादित बनी हुई है.

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