लक्ष्मी नारायणी मंदिर

वेल्लोर में स्थित लक्ष्मी नारायणी मंदिर 15000 किलोग्राम के शुद्ध सोने से बना हुआ है, विश्व में यह इकलोता ऐसा धाम जिसमें इतना ज्यादा सोना लगा हो.

ऑपइंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह मंदिर दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर माना जाता है, इस भव्य और विशाल मंदिर का कोई प्राचीन इतिहास नहीं हैं. बावजूद इसके मंदिर की सुंदर संरचना और दिव्यता इसे हिंदुओं का एक पसंदीदा तीर्थ क्षेत्र बनाती है. इस मंदिर को श्रीपुरम के नाम से भी जाना जाता है. बता दें की वेल्लोर से 7 किमी दूर थिरूमलाई कोडी में स्थित लक्ष्मी नारायणी मंदिर का निर्माण वेल्लोर के चैरिटेबल ट्रस्ट ‘श्री नारायणी पीडम’ के द्वारा कराया गया है, इस ट्रस्ट की प्रमुख हैं आध्यात्मिक गुरु श्री शक्ति अम्मा या नारायणी अम्मा.

जानकारी देते चलें की वेल्लोर से 7 किमी दूर पहाड़ियों के तलहटी में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में है आध्यात्मिक केंद्र श्रीपुरम के परिसर में ही श्री लक्ष्मी नारायणी मंदिर स्थित हैं. बता दें की मंदिर को बनाने के लिए पहले सोने को सलाई और बहुत ही पतली शीट में बदला गया जिसे तांबे की प्लेट के ऊपर सजाया गया, साथ ही कारीगरों द्वारा बड़ी ही सूक्ष्मता से कारीगरी की गई है. मंदिर परिसर में एक 27 फिट की ऊंचाई वाली दीपमालिका भी है. इसको जलाने के बाद मंदिर वास्तव में माता लक्ष्मी का निवास स्थान जैसा प्रतीत होने लगता है.

लक्ष्मी नारायणी मंदिर का निर्माण सन 2000 में शुरू किया गया था. इस भव्य मंदिर में मुख्य रूप से माता लक्ष्मी जी की ही पूजा अर्चना होती हैं. दर्शनार्थी मंदिर परिसर के दक्षिण से प्रवेश कर घड़ी की सुई की दिशा में यानि की क्लाक वाईज ढंग से घूमते हुए पूर्व दिशा तक आते हैं और यहां से मंदिर के अंदर भगवान श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन करने के बाद फिर पूर्व में आकर दक्षिण से ही बाहर आ जाते हैं.

गोरतलब है की लक्ष्मी नारायणी मंदिर का एक-एक भाग वैदिक नियमों के अनुरूप ही बनाया गया है, श्रीपुरम में ही एक सामान्य अस्पताल और शोध केंद्र भी है. विक्की पीडिया के अनुसार लक्ष्मी नारायणी मंदिर भारत के तमिलनाडु में थिरुमलाइकोडी (मलाइकोडी) वेल्लोर में छोटी पहाड़ियों के तल पर श्रीपुरम आध्यात्मिक पार्क में स्थित है. यह तिरुपति से 120 किमी, चेन्नई से 145 किमी, पुदुचेरी से 160 किमी और बेंगलुरु से 200 किमी दूर है. मंदिर में मुख्यतः देवी श्री लक्ष्मी नारायणी या महालक्ष्मी (धन की देवी) की अराधना की जाती है, महालक्ष्मी का महाकुंभ 24 अगस्त 2007 को आयोजित किया गया था, सभी धर्मों के भक्तों का इस मंदिर में स्वागत किया जाता है, अनुमानतः यह मंदिर 15,000 किलोग्राम शुद्ध सोने से सुसज्जित है जो अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के गुंबद के 750 किलो के सोने के आकार का दोगुना है.

इसे भी जरुर पढिए:-

बिजली महादेव मंदिर: टुटा हुआ शिवलिंग पुनः अपने स्वरूप में लौट आता है

By Sachin

One thought on “लक्ष्मी नारायणी मंदिर: 15000 किलो सोने से बना है श्री पुरम धाम”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *