लक्ष्मण मंदिर

सिरपुर में स्थापित लक्ष्मण मंदिर प्रेम की निशानी पर बनाया गया मंदिर है जो की ताजमहल से 1000 साल पुराना है और अभी तक ज्यों का त्यों है.

अक्सर आपने सुना होगा की मुगल आक्रांता शाहजहाँ ने जो आगरा में ताजमहल बनवाया वो एक प्यार की निशानी के तौर पर बनवाया गया है, जिसे शाहजहाँ ने अपनी तीसरी पत्नी मुमताज के मरने बाद उसी के नाम से तकरीबन 500 साल बनवाया था. मगर आज आपको 1500 साल पुरे मंदिर के बारे में बताएंगे जो की प्रेम का प्रतीक है, इस मंदिर का नाम लक्ष्मण मंदिर और यह छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सिरपुर में स्थापित हैं.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर का निर्माण सन् 525 से 540 के बीच हुआ. सिरपुर (जिसे प्राचीनकाल में श्रीपुर कहा जाता था) में शैव राजाओं का शासन हुआ करता था. इन्हीं शैव राजाओं में एक थे सोमवंशी राजा हर्षगुप्त. हर्षगुप्त की पत्नी रानी वासटादेवी, वैष्णव संप्रदाय से संबंध रखती थीं, जो मगध नरेश सूर्यवर्मा की बेटी थीं. राजा हर्षगुप्त की मृत्यु के बाद ही रानी ने उनकी याद में इस मंदिर का निर्माण कराया था. यही कारण है कि लक्ष्मण मंदिर को एक हिन्दू मंदिर के साथ नारी के मौन प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है.

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गौरतलब है की भारतीय इतिहास में दर्ज की गई कई प्राक्रतिक आपदाओं को भी इस मंदिर ने झेला है और इतने सालों में मंदिर टस से मस नहीं हुआ. भारत का यह पहला ऐसा मंदिर है जो की लाल इंटों से बनाया गया हो, यह मंदिर नागर शैली में बनाया गया. लक्ष्मण मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि इस मंदिर में ईंटों पर नक्काशी करके कलाकृतियाँ निर्मित की गई हैं, जो अत्यंत सुन्दर हैं क्योंकि अक्सर पत्थर पर ही ऐसी सुन्दर नक्काशी की जाती है. मंदिर के तोरण के ऊपर शेषशैय्या पर लेटे भगवान विष्णु की अद्भुत प्रतिमा है. इस प्रतिमा की नाभि से ब्रह्मा जी के उद्भव को दिखाया गया है और साथ ही भगवान विष्णु के चरणों में माता लक्ष्मी विराजमान हैं.

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