मद्रास

भारतीय केंद्र सरकार को मद्रास हाई कोर्ट ने सभी 100 साल से पुराने मंदिरों और मूर्तियों को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के आदेश दे दिए हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तमिलनाडू के चैन्नई में स्थित मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) ने देश की केंद्र सरकार को आदेश दिया की जितने भी 100 सालों से पुराने मंदिर और मूर्तियाँ हैं उन सभी को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए, इसके अलावा मठों, कलाकृतियों और पवित्र मूर्तियों सहित सभी धार्मिक संरचनाओं को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के आदेश जारी किए गए हैं. बता दें की कोर्ट ने इसके साथ यह भी आदेश दिया की मंदिर की भूमि हमेशा मंदिर की ही रहेगी, इसका उपयोग किसी अन्य व्यक्तिगत या सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नहीं किया जा सकता.

मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) ने अपने आदेश में कहा की “इस देश के लोगों की बुद्धि, ज्ञान और कौशल उन क्षेत्रों में भी कहीं बेहतर और अचूक हैं जिनका जवाब विज्ञान को अभी तक नहीं मिला है. मौजूदा प्राचीन स्मारक और ग्रंथ इस बात का प्रमाण हैं कि इस भूमि पर रहने वाले हमारे ‘आदिवासियों’ ने 2000 साल पहले भी कई उन्नत सभ्यताओं को समझ और तकनीक के मामले में पीछे छोड़ दिया था, इस तरह के निर्माण एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक ऐतिहासिक छाप छोड़ने का एक सचेत प्रयास था”.

बता दें की कोर्ट ने मंदिरों की दुर्दशा पर दुःख जताते हुए कहा की “ये विरासत और सांस्कृतिक संपत्तियाँ आजकल गुमनामी में जा रही हैं. आने वाली पीढ़ी इसके मूल्य के बारे में नहीं जानती है”. इसके अलावा कोर्ट ने कहा की “भव्य और प्राचीन मंदिर और प्राचीन स्मारक किसी प्राकृतिक आपदा के कारण नहीं खराब हो रहे हैं, बल्कि जीर्णोद्धार और रखरखाव में प्रशासन और पुरातत्व विभाग की लापरवाही से नष्ट हो रहे हैं. यह आश्चर्यजनक है कि मानव संसाधन और पुरातत्व विभाग अपनी सारी आय के साथ भी इन मंदिरों के संरक्षण और मूर्तियों की सुरक्षा में सक्षम नहीं है. 2000 साल पहले निर्मित कई मंदिर जो यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर सूची में शामिल किए गए हैं, वो आज खंडहर बन चुके हैं”.

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