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असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा अपने निर्णयों के कारण हमेशा चर्चा में बने रहते हैं, हाल ही में उन्होंने इसी राज्य के कई मदसरों को ध्वस्त करवाया है जिनमें भारत विरोधी गतिविधियों का खुलासा हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में चल रहे मदरसों में इस्लामिक जिहादी गतिविधियों के सामने आने के बाद कड़ा रुख अपना लिया है। उन्होंने दो टूक कहा है कि अगर किसी भी मदरसे के देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के इनपुट मिलते हैं तो उन्होंने पूरी तरह से जमीदोज कर दिया जाएगा।

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का ये बयान बोगाईगाँव जिले में संचालित एक मदरसे से जिहादी गतिविधियों को संचालित किए जाने के खुलासे के बाद आया है। दरअसल, बीते बुधवार को मदरसे से इस्लामिक जिहादी एक्टिविटीज को प्रमोट करने की घटना के सामने आने के बाद अधिकारियों ने कानून के उल्लंघन करने के आरोप में ढहा दिया था। इसी के बाद अब सरमा ने बयान दिया है।

उन्होंने दो टूक लहजे में इस्लामिक कट्टरपंथियों को चेताया है कि मदरसों को बंद करने का उनका कोई इरादा नहीं है, लेकिन तब तक, जब कि जिहाद के लिए इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता। उन्होंने कहा, “अगर हमें कोई विशेष जानकारी मिलती है कि मदरसे की आड़ में भारत विरोधी गतिविधियों के लिए संस्थान का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो हम उन्हें तोड़ देंगे।”

क्या है पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि खबर मिली थी कि बोगाईगाँव जिले में स्थित एक मदरसे से खूँखार आतंकी संगठन अलकायदा और बांग्लादेश के जिहादी संगठन अंसारुल बांग्ला टीम की गतिविधियों को संचालित किया जा रहा था। इस मामले में पाँच आरोपितों को गिरफ्तार भी किया गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने टेरर सेंटर बने मदरसे को ध्वस्त कर दिया। इस साल राज्य में अब तक आतंकी कार्यों में लिप्त 40 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

इससे पहले पिछले साल एक इंटरव्यू के दौरान मदरसों को लेकर पत्रकार अमन चोपड़ा के सवालों का जबाव देते हुए सरमा ने कहा था, “मदरसों क बंद करने का इरादा है।” उन्होंने ये भी कहा था कि वो मदरसों की जगह मॉडल स्कूल बनाना चाहते हैं। इसके अलावा उन्होंने 31 अगस्त को भी बड़ा बयान देते हुए मदरसों को जिहादियों व आतंकियों का हब बताया था।

सीएम सरमा ने कहा कि मदरसों को आतंकियों के ट्रेनिंग हब के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि इन मदरसों में शिक्षा की बजाय आतंक की ट्रेनिंग दी जा रही है। सरमा ने कहा कि असम में अब तक ऐसे दो मदरसों को गिराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि देश में जब तक मदरसे रहेंगे, तब तक बच्चे इंजीनियर और डॉक्टर बनने के बारे में नहीं सोच पाएंगे।

इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अगर आप बच्चों को धर्म से जुड़ी शिक्षा देना चाहते हैं तो घर पर दें, उसके लिए मदरसे का होना जरूरी नहीं है। आपको जानकारी देते चलें कि असम सरकार ने 2020 में मदरसों को अनुदान देना बंद कर दिया था। हिमंत उस समय राज्य के शिक्षा मंत्री थे। इस फैसले के बाद राज्य में करीब 800 मदरसे बंद हो गए थे। हालांकि 1000 से ज्यादा निजी मदरसे अब भी चल रहे हैं।

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