यति नरसिंहानंद सरस्वती

डासना के शिव-शक्ति मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती जी ने एक बयान जारी किया है, जिसमें वे मुसलमानों के सभी दावों को गलत करार दे रहे हैं.

यति नरसिंहानंद सरस्वती

उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में डासना में स्थित देवी मंदिर पिछले कुछ समय से बहुत सुर्खियाँ बटोरे हुए हैं, क्योंकि एक आसिफ़ नाम के किशोर लड़के की मंदिर के परिसर के भीतर पिटाई कर दी गई. आसिफ ने कहा था की पानी पीने गया था और मुस्लिम होने के कारण मुझे पिटा गया, लेकिन पिटाई करने वाले युवक श्रंगा यादव ने बताया की आसिफ मंदिर के शिवलिंग पर टॉयलेट कर रहा था इसलिए उसे पिटा.

महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती जी का बयान

इस मामले में कई मुसलमानों ने ये दावे किए की हमारे पूर्वजों ने इस मंदिर निर्माण में मदद की थी, इसका प्रतिकार करते हुए मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती जी ने उनके ये सारे दावे गलत करार दिए हैं.

मुसलमानों के पास कोई रिकॉर्ड नहीं

एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती जी ने कहा की “स्थानीय मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे और उन्होंने शायद 200 साल पहले मंदिर के निर्माण में योगदान दिया था, मगर किसी के पास भी इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है, मेरे पास इस मंदिर के लिए किए गए प्रत्येक दान का विवरण है और मैं गारंटी दे सकता हूँ कि उनमें से कोई भी स्थानीय मुस्लिम आबादी से नहीं है”.

बता दें की इस शिव-शक्ति मंदिर के गेट पर एक बोर्ड लगा हुआ है, जिस पर लिखा है की “यह मंदिर हिन्दुओं का पवित्र स्थल है, यहाँ मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है”. इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा की “यह बोर्ड हमेशा के लिए रहेगा, हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले किसी भी व्यक्ति को मंदिर में प्रवेश करने से रोका नहीं जाएगा, यह बोर्ड केवल उन लोगों के लिए है, जिनका धार्मिक गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है”.

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