मनाकुला विनायगर मंदिर

पुडुचेरी में स्थित मनाकुला विनायगर मंदिर शिव जी के पुत्र और हिंदु मान्यताओं के अनुसार सबसे पहले पूजे जाने वाले भगवान गणेश जी को समर्पित हैं.

भगवान शिव के छोटे पुत्र श्री गणेश भगवान को समर्पित मनाकुला विनायगर मंदिर अपने आप में अत्यंत दिव्य और अद्भुत हैं. हिंदु मान्यताओं के मुताबिक किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले भगवान श्री गणेश को ही पूजा जाता है. भगवान गणेश की सवारी चूहा है, ऐसे में उन्हें चूहों का स्वामी भी माना गया है. भारत के पुडुचेरी में भगवान गणेश का प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं, मनाकुला विनायगर मंदिर का इतिहास भी अत्यंत प्राचीन हैं. इस स्थान पर सदियों से भक्तों के कष्ट दूर होते आ रहे हैं.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक मनाकुला विनायगर मंदिर का इतिहास 500 सालों से भी अधिक पुराना है, कहा जाता है कि जब फ्रांसीसी पुडुचेरी आए तो उन्होंने हिंदुओं के मन में इस मंदिर के प्रति अथाह श्रद्धा-भाव देखा. इसी के चलते फ्रांसीसियों ने भगवान गणेश की प्रतिमा को समुद्र में डुबो दिया, लेकिन यह चमत्कार ही था कि प्रतिमा फिर से अपने स्थान पर वापस आ जाती है. बता दें की मंदिर के अनुष्ठानों में भी कई तरह के विघ्न डालने के प्रयास भी हुए लेकिन हर बार भगवान गणेश के आशीर्वाद से विघ्न पहुँचाने वालों को असफलता हाथ लगती थी.

बताया जाता है इन्हीं चमत्कारों के कारण मनाकुला विनायगर मंदिर केवल मात्र पुडुचेरी ही नहीं बल्कि पूरे भारत भर के हिंदुओं के लिए यह मंदिर अत्यंत महत्व का है. गौरतलब है की तमिल भाषा में बालू को मनल कहा जाता है और कुलन का अर्थ है जल स्रोत या सरोवर. इन्हीं दो तमिल शब्दों से मिलकर बना मनाकुला. कहा जाता है कि जहाँ आज भगवान गणेश विराजमान हैं वहाँ बहुत अधिक मात्रा में बालू हुआ करती थी. इस कारण भगवान गणेश के इस स्थान को मनाकुला विनायगर कहा गया. मंदिर का मुख सागर की तरफ है, इस कारण इस मंदिर को भुवनेश्वर गणपति भी कहा जाता है.

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